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स्कूल परिसर में नहीं, जनता के बीच होंगी बाल सभाएं

शिक्षा विभाग की ओर से बालकों में शैक्षणिक, सह शैक्षणिक क्षेत्र में गुणात्मक तथा सामाजिक सौहार्द व समन्वय में वृद्धि के लिए माह के प्रत्येक शनिवार को स्कूल परिसर की बजाय गांव-ढाणी व जनता के बीच बाल सभाएं होंगी। बालसभा में विद्यार्थी 60 मिनट तक गांववासियों के सामने विभिन्न तरह के संदेश देकर मनोरंजन भी करेंगे।
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बीकानेर

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Nikhil Swami

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Updated: 9 Feb 2019, 11:04 AM IST

school meeting

school meeting

निखिल स्वामी/बीकानेर. शिक्षा विभाग की ओर से बालकों में शैक्षणिक, सह शैक्षणिक क्षेत्र में गुणात्मक तथा सामाजिक सौहार्द व समन्वय में वृद्धि के लिए माह के प्रत्येक शनिवार को स्कूल परिसर की बजाय गांव-ढाणी व जनता के बीच बाल सभाएं होंगी। बालसभा में विद्यार्थी 60 मिनट तक गांववासियों के सामने विभिन्न तरह के संदेश देकर मनोरंजन भी करेंगे।


इसके लिए स्कूल शिक्षा एवं भाषा विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं समग्र शिक्षा अभियान के पदेन जिला परियोजना समन्वयक, आरएससीईआरटी के निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। निर्देश में कहा गया है कि बालसभा प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में माह के प्रत्येक शनिवार को बालसभा करना जरूरी होगा।

सार्वजनिक स्थानों पर छात्र-छात्राओं को सुरक्षित पहुंचाने एवं पुन: विद्यालय तक लाने की जिम्मेदारी संस्था प्रधान व शिक्षकों की होगी। बालसभा में विद्यालय में उपलब्ध संसाधन ही उपयोग लिए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामवासियों व अभिभावकों से सहयोगी लिया जा सकता है।

पहले सरपंच से चर्चा करेंगे
संस्था प्रधान बालसभा से पहले पंचायत के सरपंच, वार्डपंच, प्रबुद्ध नागरिकों से चर्चा कर सार्वजनिक स्थान का चयन करेंगे। बालसभा के लिए हर बार अलग स्थान का चयन किया जाएगा। बालसभा में ग्रामीणों को भी बुलाया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों के अभिभावक भी उपस्थित होंगे।

हर कालांश में दस मिनट कटौती
बालसभा के दिन स्कूलों में कालांश में दस मिनट की कटौती की जाएगी। इसके बाद स्कूल के अंतिम दो कालांश 80 मिनट के रहेंगे।


ये गतिविधियां होंगी
बालसभा के दौरान कौशल अभिव्यक्ति, चिंतन, तार्किक कौशल, सामाजिक-संवेदनशीलता कौशल, सृजनात्मक कौशल, सामुदायिक कौशल, शारीरिक कौशल सहित विभिन्न गतिविधियां होगी।

नए-नए प्रयोग
&वर्तमान सरकार भी शिक्षा विभाग में नए-नए प्रयोग करना चाहती है। इसी के तहत ये बालसभाएं गांव के सार्वजनिक स्थानों पर करवाने का आदेश दिया है, यह औचित्यहीन है। सरकार को चाहिए है कि बालसभाएं स्कूल परिसर में ही होनी चाहिए।
श्रवण पुरोहित, प्रदेश मंत्री, शिक्षक संघ शेखावत