
cancer train
बीकानेर।
कैंसर रोग महामारी का रूप ले रहा है। राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित पीबीएम से संबद्ध आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र 12 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो सेंटर में हर साल कैंसर रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2007 में 5576 कैंसर रोगी रिपोर्ट हुए वहीं वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 11299 पहुंच गया है।
आचार्य तुलसी अस्पताल में वर्ष 2015 से 2018 तक कुल 41,821 नए मरीज पहुंचे, जिनमें से 29897 मरीज केवल राजस्थान के हैं। इसके अलावा 12471 मरीज पंजाब, हरियाणा एवं यूपी के हैं। इन मरीजों में 19357 पुरुष, 16052 महिलाएं और शेष 6412 बच्चे शामिल हैं।
राजस्थान के बीकानेर जिले में कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। वर्ष 2015 से अब तक बीकानेर जिले के 6357 रोगी रिपोर्ट हुए हैं, जिनमें से पुरुष 3063 एवं महिलाएं 2907 और शेष 387 बच्चे शामिल हैं। यह आंकड़े किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। बड़े अचरज की बात है कि वर्ष 2007 में केवल 86 मरीज थे वहीं वर्ष 2018 में 1737 कैंसर रोगी रिपोर्ट हुए।
ऐसे में कैंसर मरीजों की दर्द भरी दास्तां बयान करती है कैंसर ट्रैन। बीकानेर के रेलवे स्टेशन पर अल-सुबह पंजाब के भटिंडा से चलकर रेल पहुंचती है। हालात यह है कि ट्रेन का असली नाम भूल कर लोग इस ट्रेन को कैंसर ट्रेन के नाम से पुकारने लगे हैं। इसकी वजह है ट्रेन में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज सवार होते हैं।
ये कैंसर रोगी इलाज के लिए बीकानेर के पीबीएम से संबद्ध आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र आते हैं। यात्रियों में शामिल पंजाब के फाजिल्का निवासी बलविन्द्र सिंह जो अपनी कैंसर पीडि़त मां के इलाज के लिए आए हैं। बलविन्द्र सिंह पंजाब के किसानों में बढ़ रहे कैंसर का प्रमुख कारण प्रदूषित पानी का उपयोग बताते हैं।
मरीजों से लिया जाता है 25 प्रतिशत ही किराया
अटेंडेंट का 25 प्रतिशत किराया पंजाब से आने वाले मरीजों को देखते हुए भारतीय रेल प्रशासन ने राज्य सरकार के निर्देशानुसार बड़ी सहायता मुहैया करा रही है। जोधपुर-भठिंडा ट्रेन में सफर करने वाले कैंसर पीडि़त को नि:शुल्क और एक अटेंडेंट का 25 प्रतिशत ही किराया वसूल किया जाता है।
इतना ही नहीं मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल से ही मरीजों को पास बनाकर दिया जाता है। अस्पताल में हरदिन 150 पास जारी किए जाते हैं। वर्षों से इस ट्रेन से आम पैसेंजर से ज्यादा कैंसर रोगी होती है। इसलिए अब ट्रेन का नाम ही कैंसर ट्रेन रह गया है।
Published on:
3 Feb 2019, 7:13 PM IST
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