
शहर की निजी जांच लैबों में एक्स-रे कराने वाले मरीज रेडिएशन की चपेट में आ रहे हैं। यहां बने एक्स-रे कक्ष नियमानुसार और मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। अधिकतर एक्स-रे मशीनें एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से रजिस्ट्रर्ड नहीं है। ऐसे में मरीजों के साथ यहां कार्यरत स्टाफ के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
बीमारियों का खतरा
पीबीएम अस्पताल के रेडियो डायग्नोसिस विंग के रेडियो सेफ्टी ऑफिसर घासीराम शर्मा के मुताबिक रेडिएशन से कैंसर और नपुंसकता जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लगातार रेडिएशन के चपेट में आने से थायराइड, मोतियाबिंद और त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। गर्भवती महिला अगर रेडिएशन के चपेट में आती है तो नवजात के शरीर में विकृति की संभावना बढ़ जाती है।
18 से 30 वर्ष की उम्र में होने वाले साधारण कमर दर्द में एलएस स्पाइन एक्स-रे कराने की चिकित्सक सलाह देते हैं, जिससे सीधी किरणें उनके अनुवांशिक अंगों पर पड़ती है। इससे आने वाली पीढ़ी मंदबुद्धि या विकलांग पैदा होने की आशंका रहती है।
बेवजह के एक्स-रे
संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना शुरू होने के बाद एक्स-रे कराने वाले मरीजों की संख्या में दो गुना हो गई। हर माह ढाई सौ से तीन सौ मरीज एक्स-रे लेने नहीं पहुंचते। नि:शुल्क जांच योजना शुरू होने और रेडिएशन से अनजान होने से पिछले दो साल में दो गुना मरीज बढ़ गए हैं।
हालात ये हैं कि मरीज एक्स-रे करवा लेते हैं, लेकिन दवा से आराम मिलने पर वापस नहीं आते। दो साल में 5800 मरीज एक्स-रे लेने ही नहीं आए। ऐसे में बेकार एक्स-रे फिल्मों का पीबीएम के एक कमरे में ढेर लग गया है। चिकित्सकों के मुताबिक मरीज एक्स-रे की जरूरत नहीं होने की सलाह देने पर भड़क जाते हैं।
होना यह चाहिए
एईआरबी के मापदंड के अनुसार एक्स-रे रूम का साइज 13 गुणा 15 फीट एवं 10 फीट ऊंचाई जरूरी है। दीवार की मोटाई आरसीसी से नौ इंच होनी चाहिए। एक्स-रे ट्यूब की दिशा उस ओर होनी चाहिए, जिस तरफ लोगों का आना-जाना कम हो। सभी एक्स-रे मशीनों का एईआरबी से रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
बेहद हानिकारक
किसी एक मरीज के सिर का सिटी स्केन कराने पर लगने वाली किरणों की डॉज 100 चेस्ट एक्स-रे के बराबर होती है, जो मरीज के लिए बेहद हानिकारक है।
Published on:
13 Oct 2017, 2:41 PM IST
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