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धोखाधड़ी के आरोप में कांग्रेस पार्षद समेत परिवार पर FIR, बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस को निष्पक्ष जांच के दिए निर्देश

Congress Councilor Controversy: बिलासपुर हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्षद रीता सिंह, पति और बेटे पर 4.39 करोड़ के जमीन-क्रशर लेनदेन मामले में दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
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Bilaspur High Court

कांग्रेस पार्षद और परिवार पर धोखाधड़ी का आरोप (photo source- Patrika)

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में जमीन, क्रशर प्लांट और मशीनरी से जुड़े करीब 4.39 करोड़ रुपये के लेन-देन के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में भिलाई की कांग्रेस पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद्र सिंह और बेटे मानव चंद्र सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के आरोप सामने आते हैं। ऐसे में मामले की जांच को शुरुआती स्तर पर रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को निष्पक्ष और व्यापक तरीके से जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

Crusher Plant Dispute: क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, उतई थाना क्षेत्र में जमीन, क्रशर प्लांट और मशीनरी से जुड़े लेन-देन को लेकर विवाद सामने आया है। भिलाई निवासी कांग्रेस पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद्र सिंह और बेटे मानव चंद्र सिंह के खिलाफ बीबी सिंह की शिकायत पर बीते 2 अगस्त को उतई थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बताया गया है कि यह मामला कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ। एफआईआर के खिलाफ पार्षद और उनके परिवार के दोनों सदस्यों ने हाई कोर्ट का रुख किया और इसे रद्द करने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं ने 2008 में जमीन खरीदने की बात कही

हाई कोर्ट में दायर याचिका में पार्षद और उनके परिवार की ओर से बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2008 में कुल 15 जमीन के टुकड़े खरीदे थे। इनमें से 7 जमीनों का पंजीकृत बिक्री विलेख कराया गया था, जबकि बाकी 8 जमीनों पर एग्रीमेंट के आधार पर कब्जा लेने की बात कही गई याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, बाद में 29 फरवरी 2024 को जमीन, मशीनरी और क्रशर प्लांट को लेकर दूसरे पक्ष के साथ समझौता हुआ। इस समझौते के बाद संपत्ति का कब्जा सौंपे जाने की बात भी याचिका में कही गई। इसके बाद बिजली बिल, खनन से जुड़ी देनदारियों और भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप

बीबी सिंह की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि समझौते में शामिल कुछ जमीनें तीसरे पक्ष की थीं। कुछ जमीनें सरकारी लीज से जुड़ी हुई थीं, जबकि कुछ संपत्तियों पर याचिकाकर्ताओं के पास हस्तांतरण करने योग्य अधिकार नहीं थे। शिकायत में करीब 4.39 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप भी शिकायत में शामिल है। इन आरोपों के आधार पर उतई पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसके बाद पार्षद और उनके परिवार की ओर से एफआईआर रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

याचिकाकर्ताओं ने बताया सिविल और कारोबारी विवाद

याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि पूरा विवाद मूल रूप से सिविल और व्यावसायिक प्रकृति का है। उनका कहना था कि जमीन, क्रशर प्लांट, मशीनरी और भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है, इसलिए इसे आपराधिक मामले का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने उतई थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की।

हाई कोर्ट ने क्यों नहीं रद्द की FIR?

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले में सिविल विवाद या सिविल मुकदमा लंबित होना अपने आप आपराधिक जांच पर रोक लगाने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने माना कि शिकायत में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के आरोप दिखाई देते हैं। ऐसे में जांच के शुरुआती चरण में एफआईआर को रद्द करना उचित नहीं होगा। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर मामले का परीक्षण ट्रायल के दौरान भी किया जा सकता है।

Land Fraud FIR: पुलिस को किन बिंदुओं पर जांच के निर्देश?

हाई कोर्ट ने पुलिस को मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान जमीन और संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जाएगी। कोर्ट ने पुलिस को जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और पंजीयन दस्तावेजों की जांच करने को कहा है। इसके साथ ही सरकारी लीज से जुड़े रिकॉर्ड, खनन की अनुमति, पावर ऑफ अटॉर्नी और बैंक खातों के लेन-देन की भी जांच की जाएगी। विवादित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की भी जांच होगी। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और लेन-देन किस परिस्थितियों में हुआ।

अब जांच पर टिकी नजर

हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब उतई पुलिस इस पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। पुलिस को जमीन, क्रशर प्लांट, मशीनरी, भुगतान और दस्तावेजों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने आरोपों को सही या गलत नहीं माना है, बल्कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के आरोप होने के कारण जांच जारी रखने की अनुमति दी है। अब पुलिस की जांच और उसके बाद सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है। इस मामले में कांग्रेस पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेशचंद्र सिंह और बेटे मानव चंद्र सिंह को फिलहाल एफआईआर रद्द कराने की याचिका पर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी।