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नियमों को धता बता रेट कांट्रैक्ट की बजाय एसईसीएल में लोकल परचेज का बोलबाला

बीएसएनएल जैसी सरकारी कंपनी के साथ एसईसीएल का डिपो एग्रीमेंट है।
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बिलासपुर

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Anil Kumar Srivas

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Updated: 3 Aug 2018, 1:18 PM IST

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नियमों को धता बता रेट कांट्रैक्ट की बजाय एसईसीएल में लोकल परचेज का बोलबाला

राजकुमार सिंह/ बिलासपुर. कोयला उत्पादन में नित नए रिकार्ड बनाने वाले एसईसीएल में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एसईसीएल की कालरियों द्वारा उत्खनन कार्य में इस्तेमाल किए जाने वाली मशीनों के रिपेयर आयटमों की खरीदी लोकल स्तर पर की जा रही है। जबकि कोल इंडिया ने इसके लिए सख्त नियम बनाए हैं और लोकल परचेजिंग की साफ मनाही है। कोल इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार कोयला उत्खनन में इस्तेमाल किए जाने वाले मशीनों, शावेल, क्रेन, डोजर, डंपर, ड्रैगलाइन जैसी अधिकांश मशीनें आयातित हैं। और इन इक्विपमेंट के रिपेयर आयटम की खरीदी सिर्फ ओरिजिनल इक्विपमेंट मैनुफैक्चरर (ओईएम) से ही की जा सकती है। इसके लिए एसईसीएल और ओईएम कंपनियों के साथ प्रति वर्ष बाकायदा रेट कांट्रैक्ट किए जाते हैं। बीएसएनएल जैसी सरकारी कंपनी के साथ एसईसीएल का डिपो एग्रीमेंट है। लेकिन ज्यादा कमीशन के लालच में एरिया इन नियमों को धत्ता बता लोकल परचेजिंग में मस्त है। मजे की बात है कि एरिया की लोकल खरीदी के अधिकांश मामलों से हेडक्वार्टर अनजान है। ज्ञात हो कि एसईसीएल ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 180 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है। सिर्फ कोयले की ढुलाई के लिए ही एसईसीआर को 17 हजार करोड से अधिक का भुगतान किया है।

वारंटी पीरियड खत्म होने वाले मशीनों में करते हैं खेल : एसईसीएल की खदानों में कोयला उत्खनन कार्य में लगी कई मशीनें सर्वेड ऑफ है, या यूं कहें उनकी उम्र पूरी हो गई। लेकिन मशीन की कंडीशन ठीक-ठाक होने के कारण इन मशीनों को चलाया जा रहा है। इन्हीं मशीनों के रिपेयर में लोकल परचेज का खेल हो रहा है। इन मशीनों पर उन कंपनियों की निगरानी भी नहीं रहती, जिन्होंने इसे सप्लाई किया है। बस इसी आड़ में एरिया सीजीएम से लेकर स्टाफ आफिसर, मैटेरियल मैनेजर, फायनेंस मैनेजर से लेकर तमाम अधिकारी रेट कांट्रैक्ट को धत्ता बता लोकल परचेज कर रहे हैं। औैर अधिकांश मामलों की जानकारी हेडक्वार्टर तक भी नहीं पहुंचती। एरिया में ही मामले को निपटा लिया जाता है।

लोकल परचेजिंग के हैं कई नुकसान : अब जरा इस बात को समझें कि लोकल परचेजिंग से एसईसीएल को क्या नुक्सान और फायदा किसे है। कोयला उत्खनन के लिए तमाम तरह की लगाई गई मशीनें डंपर, डोजर, शावेल, एक्सवेटर, क्रेन एवं अन्य मशीनें इंपोर्टेड हैं। इनमें पीएंड एच कोबेल्को, हार्निसफिगर, मैरियन, एलएंटडी समेत तमाम मल्टी नेशनल कंपनियां शामिंल है। इन मशीनों की वारंटी तभी तक वैध है जब इनके रिपेयर कार्य में ओईएम पार्टस लगाए जाएं, या मुख्तलिफ कंपनियां किसी विशेष कंपनी के पार्टस लगाने के लिए निर्देशित करती हैं। मसलन कई मशीनों में टिमकेन या एसकेएफ कंपनी की बेयरिंग ओई फिटमेंट के तौर पर लगी है, लेकिन टिमकेन डंपर नहीं बनाती है। लिहाजा ओईफिटमेंट के नाते ये ओईएम है और इनसे खरीदी की जा सकती है।लेकिन लोकल पुर्जे लगाने से मशीन खराब होती है और कंपनियां वारंटी का फायदा भी नहीं देतीं।
अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी लेता हूं : एरिया से लोकल परचेज की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है, अगर ऐसा हो रहा है तो ये काफी गंभीर बात है। अधिकारियों से चर्चा कर इस बात की जानकारी लेता हूं। वैसे इसकी संभावना काफी कम है, अगर ब्यौरा दे सकें तो पता लगाने में आसानी होगी।
नरेंद्र कुमार, (चीफ मैनैजर)
पीआर, एसईसीएल