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इमली का पेड़ काटने पर 21 हजार जुर्माना, परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का आरोप, बिलासपुर हाईकोर्ट सख्त

High Court: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में इमली का पेड़ काटने के विवाद में एक परिवार पर जुर्माना लगाने और सामाजिक बहिष्कार करने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है।
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Bilaspur High Court

हाईकोर्ट (Photo Source- Patrika File Photo)

Bilaspur High Court: गांव में सामाजिक बहिष्कार और कथित जुर्माने से जुड़े मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस को कानून के मुताबिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। दरअसल, राजनांदगांव जिले के ग्राम गेरूघाट के एक दंपति ने आरोप लगाया है कि इमली का पेड़ हटाने के बाद गांव के कुछ लोगों ने उन पर 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और रकम नहीं देने पर परिवार से संबंध रखने पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने दंपति को छुरिया थाने में शिकायत देने और संज्ञेय अपराध सामने आने पर तत्काल FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।

पेड़ हटाने के बाद गांव में बैठक होने का दावा

मामला राजनांदगांव जिले की छुरिया तहसील के ग्राम गेरूघाट का है। याचिकाकर्ता करण कुमार यादव और उनकी पत्नी के अनुसार, उनके घर के पास लगा पुराना इमली का पेड़ तेज आंधी-तूफान में गिर गया था। घर को नुकसान और परिवार या पड़ोसियों को चोट लगने की आशंका के चलते उन्होंने पेड़ को काटकर हटा दिया।

दंपति का आरोप है कि इसके बाद गांव के कुछ लोगों ने बैठक कर उन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। बाद में इस रकम को घटाकर 21 हजार रुपये कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि जुर्माना नहीं चुका पाने पर परिवार के सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया गया और ग्रामीणों को उनसे मेलजोल व लेन-देन नहीं करने की हिदायत दी गई।

राशन कार्ड के आवेदन को लेकर भी विवाद

दंपति ने याचिका में ग्राम पंचायत के सरपंच पर भी फैसला लेने वाले लोगों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पत्नी की ओर से जमा राशन कार्ड का आवेदन रोक लिया गया। साथ ही, जुर्माने की रकम चुकाने तक सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुविधाओं का लाभ नहीं देने की बात कही गई।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कथित जुर्माने और सामाजिक बहिष्कार के फैसले को निरस्त करने, परिवार को सुरक्षा देने और सरकारी योजनाओं सहित जरूरी सुविधाओं का लाभ निर्बाध रूप से दिलाने की मांग की।

शासन ने बताया- अब तक दर्ज नहीं हुई FIR

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। शासन के अनुसार, दंपति पहले छुरिया थाने में शिकायत प्रस्तुत करें। शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर FIR दर्ज की जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता दंपति को छुरिया थाने में आरोपियों के खिलाफ आवेदन देने का निर्देश दिया। साथ ही थाना प्रभारी को कहा कि शिकायत में संज्ञेय अपराध सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।

कोर्ट के निर्देश के बाद अब दंपति को थाने में शिकायत प्रस्तुत करनी होगी। मामले में लगाए गए जुर्माने, सामाजिक बहिष्कार और राशन कार्ड का आवेदन रोकने से जुड़े आरोपों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।