जाकिर की पोस्ट में लिखा हुआ है कि वो तुम्हें इंसान नहीं समझते. इसलिए नहीं है कोई लाइन, ना कोई बाउंड्री हैं. तुम्हारी लाश उनके लिए कोई रूह निकला हुआ जिस्म नहीं. बस तस्वीर लेने का एक और मौका है. जितनी हो सके, उतनी. ये वैसे है, जैसे दंगों में किसी जलते घर में से बर्तन चुराने की कोशिश करना.’ क्योंकि उनके इसके बाद, तुम क्या ही काम आओगे, ज्यादा से ज्यादा 10 तस्वीरें, 5 खबरें, 3 वीडियोज, 2 स्टोरीज, 1 पोस्ट और बस खत्म...इसलिए तुम्हारी मौत तमाशा ही रहेगी...रोती मां भी तमाशा, गम से टूटा हुआ बाप तमाशा, बेसुध बहन, हिम्मत हारे हुए भाई, तुमसे मोहब्बत करता हर इंसान उनके लिए बस तमाशा है।