
धर्मेंद्र मे दी बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में
Dharmendra Death: बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र का निधन हो गया है। उन्होंने 89 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। एक्टर की कुछ समय से तबीयत खराब चल रही थी, उन्होंने सांस लेने में दिक्कत के चलते हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था, बाद में एक्टर का परिवार उन्हें डिस्चार्ज करवा कर घर से गए थे, वहीं एक्टर ने 24 नवंबर को आखिरी सांस ली है। धर्मेंद्र के फैंस की दुनिया में कमी नहीं हैं। लाखों लोग एक्टर को पसंद करते हैं।
धर्मेंद्र ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, लेकिन एक समय वह इंडस्ट्री से इतने दुखी हो गए थे कि अवॉर्ड फंक्शन में जाने के लिए उन्होंने कहा था कि मैं कच्छा पहन के चला जाऊंगा।
धर्मेंद्र का फिल्मी सफर जीत, दिल टूटने और किस्सों से हमेशा भरा रहा है, लेकिन अवॉर्ड से उनका रिश्ता हमेशा एक अलग रहा है। यह एक ऐसी कहानी है जो उनके सुपरस्टारडम के पीछे छुपी हंसी और दर्द दोनों को दिखाती है। यह बात तब सामने आई जब साल 1997 में धर्मेंद्र ने मंच पर खड़े होकर एक मुस्कान के साथ अपने दिल का दर्द बयां किया था, जिसमें सालों की निराशा साफ नजर आई थी।
धर्मेंद्र ने पॉप्युलर फिल्म अवॉर्ड का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड न मिलने पर दिल की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि शुरुआत में उन्हें ये बात काफी परेशान करती थी, लेकिन अब वह अपने दर्शकों के अपार प्यार को 'धूल भरी ट्रॉफियों' से ज्यादा अहमियत देते हैं। जब एक्टर को दिलीप कुमार और सायरा बानो ने साल 1997 में 42वें फिल्मफेयर अवॉर्ड में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया था तब धर्मेंद्र ने कहा, "मुझे काम करते हुए 37 साल हो गए हैं। हर साल मैं एक नया सूट सिलवाता था, मैचिंग टाई ढूंढता था, इस उम्मीद में कि मुझे कोई अवॉर्ड मिलेगा लेकिन मुझे कभी अवॉर्ड नहीं मिला।"
धर्मेंद्र यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, "मेरा सिल्वर, गोल्डन जुबली सब हुआ लेकिन मुझे कोई अवॉर्ड नहीं मिला। फिर कुछ सालों बाद, मैंने हार मान ली। मैंने फैसला किया कि मैं टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनकर अवॉर्ड फंक्शन में जाऊंगा या कच्छा पहनकर चला जाऊंगा।"
धर्मेंद्र ने हमेशा अपने अलग-अलग इंटरव्यू में कहा, "जनता का प्यार ही आपकी असली पहचान है। मैं लोगों से मिलने वाले प्यार को किसी शेल्फ पर पड़ी धूल भरी ट्रॉफियों से कहीं बेहतर मानता हूं। PTI के साथ एक इंटरव्यू में, धर्मेंद्र से पूछा गया था कि उन्हें कोई पुरस्कार क्यों नहीं मिला? उन्होंने कहा था कि आमतौर पर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड पाने का मतलब रिटायरमेंट होता है लेकिन मैं शांत नहीं बैठूंगा। मैं इस पर कमेंट नहीं करना चाहता कि मुझे अवॉर्ड क्यों नहीं मिला, लेकिन मुझे लगता है कि फिल्म फूल और पत्थर, सत्यकाम, चुपके चुपके, प्रतिज्ञा, शोले और नया जमाना जैसी कई सुपरहिट फिल्मों के लिए मुझे सम्मानित किया जाना चाहिए था।"
धर्मेंद्र ने साल 2023 में आई अपनी फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' की सफलता के बाद भी इसी मुद्दे को उठाया था और कहा था कि उनका परिवार बेटे सनी और बॉबी को भी मार्केटिंग नहीं आती, इसलिए उन्हें भी उनका हक नहीं मिला। हमें इंडस्ट्री से सम्मान की जरूरत नहीं है। हमारे फैंस का प्यार ही हमें आगे बढ़ने के लिए काफी हैं।"
धर्मेंद्र ने अपना करियर 1960 में फिल्म "दिल भी तेरा, हम भी तेरे" से शुरू किया था। उस समय महज 51 रुपये फीस एक्टर को मिली थी। जल्द ही उन्होंने एक्शन हीरो, रोमांटिक लीड और कॉमिक मास्टर के रूप में अपनी पहचान बना ली थी। 60 के दशक के आखिर तक, 'गरम धरम' सिर्फ केवल एक नाम नहीं, बल्कि करिश्मा और साहस का प्रतीक बन गया था। धर्मेंद्र के आज भी लाखों चाहने वाले हैं, जो उनसे बेहद प्यार करते हैं।
Updated on:
24 Nov 2025 10:22 pm
Published on:
16 Nov 2025 09:14 am
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