
धुरंधर 2 में क्या है बड़े साहब का सच
Dhurandhar Bade Sahab hows Dawood Ibrahim: रणवीर सिंह की फिल्म'धुरंधर: द रिवेंज'बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही हैं। एक तरफ इस फिल्म की कहानी को देख लोगों में अलग ही जोश दिखाई दे रहा है। वहीं इसकी आलोचना भी हो रही है। इस फिल्म की कहानी महज काल्पनिक है या कुछ इसमें असली चीजें भी दिखाई गई हैं लोग उनके बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं। जिस वजह से लोगों ने एक पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।
फिल्म में 'बड़े साहब' नाम के एक किरदार को बिस्तर पर अपनी आखिरी सांसें गिनते हुए दिखाया गया है, जिसका हुलिया और अंदाज सीधे तौर पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की याद दिलाता है। जिसमें वह किरदार बेहद बीमार है और अपनी जिंदगी की आखिरी सांसे गिर रहा है। ऐसे में फिल्म देखने के बाद दर्शकों के मन में ये सवाल तेजी से घूम रहा है कि क्या वाकई दाऊद अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर है? क्या वह मरने वाला है? आइये जानते हैं इस बारे में मशहूर लेखिका और वरिष्ठ पत्रकार शीला रावल ने क्या बताया जो उनसे मिल चुकी हैं...
शीला रावल ने दाऊद इब्राहिम को लेकर एक अलग ही तस्वीर पेश की है। शीला रावल उन चुनिंदा पत्रकारों में से हैं जिन्होंने दाऊद को करीब से देखा और उसका इंटरव्यू किया है। 'न्यूज पिंच' से बातचीत में उन्होंने अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि 22 जुलाई 2005 को दुबई के हयात होटल में दाऊद की बेटी माहरूह के वलिमा के दौरान उन्होंने डॉन को सामने से देखा था। शीला के मुताबिक, उस वक्त दाऊद बिल्कुल वैसा ही दिख रहा था जैसा अपनी पुरानी तस्वीरों में नजर आता है, बस उम्र की वजह से उसके सिर के बाल थोड़े कम हो गए थे।
फिल्म 'धुरंधर' में दिखाए गए दृश्यों पर टिप्पणी करते हुए शीला ने साफ कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक दाऊद इब्राहिम मरने वाली हालत में नहीं है। उन्होंने बताया, "दाऊद अब करीब 70 साल का हो चुका है। उम्र के साथ आने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं उसे भी हो सकती हैं, लेकिन वह बिस्तर पर पड़ा है या मरने वाला है, ऐसी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।"
शीला रावल का मानना है कि दाऊद का बाहर न निकलना उसकी बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के डर और सुरक्षा कारणों से है। उन्होंने खुलासा किया कि कुछ महीनों पहले ही उनके सूत्रों ने पुष्टि की थी कि दाऊद जिंदा है और ठीक है।
फिल्म 'धुरंधर' को लेकर शीला ने दर्शकों को एक अहम सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ एक 'क्रिएटिव कंटेंट' के तौर पर देखा जाना चाहिए। फिल्मकार अक्सर एक खास संदेश देने या अपनी कहानी को प्रभावशाली बनाने के लिए कल्पना का सहारा लेते हैं। उनके मुताबिक, स्पाई (जासूसी) फिल्मों का यह दौर अभी और लंबा चलेगा, क्योंकि अब ऐसे कंटेंट को सिस्टम और दर्शकों, दोनों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
भले ही परदे पर 'बड़े साहब' को लाचार दिखाया गया हो, लेकिन हकीकत की जमीन पर दाऊद इब्राहिम आज भी एक ऐसी पहेली बना हुआ है, जिसका जवाब सुरक्षा एजेंसियां दशकों से ढूंढ रही हैं।
Updated on:
31 Mar 2026 08:57 am
Published on:
31 Mar 2026 08:56 am
बड़ी खबरें
View Allबॉलीवुड
मनोरंजन
ट्रेंडिंग
