जावेद अख्तर ने अपने इंटरव्यू के दौरान कहां कि दुनिया भर में एक राइट विंग है। वही देश में अल्पसंख्यकों के मामले को लेकर उन्होंने कहा कि यह तालिबान बनने का पूरा रिहर्सल चल रहा है। यह लोग वैसे ही लोग हैं जैसे कि तालिबान। ये एक ही लोग है, बस नाम अलग-अलग है। वहीं भारतीय संविधान इनके रास्ते का कांटा है, लेकिन अगर इन्हें मौका मिला तो वह इसकी बाउंड्री भी पार कर जाएंगे। गौरतलब है कि जावेद अख्तर मुस्लिम के उस तबके की आलोचना कर चुके हैं जो तालिबान की सत्ता पर काबिज होने से खुश है। वही जावेद अख्तर ने कहा कि मुझे लगता है कि उन लोगों को आत्मचिंतन करने की जरूरत है जो लोग वीएचपी, बजरंग दल, आरएसएस जैसे संगठनों का समर्थन करते हैं। मैं पूरी तरह से इस बात को स्वीकार करता हूं कि तालिबान बर्बर है, मध्ययुगीन मानसिकता वाला है, लेकिन यह संगठन भी कौन सा इनसे अलग है। इनकी जमीन मजबूत हो रही है और वह अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहे हैं, दोनों की मेंटालिटी एक ही है।