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‘गटर छाप, सड़क छाप’ वाले बयान पर अभी भी चुप नहीं हैं कंगना रनौत, जानिए अब क्या कहा

Kangana Ranaut Post: कंगना रनौत ने Gen Z और प्रदर्शनकारी युवाओं को 'जनरेशन गटर' और 'सड़क छाप' कहकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। उनकी चारों तरफ ट्रोलिंग हो रही है। सौरभ दास ने भी एक्ट्रेस पर पलटवार किया है, वहीं कंगना भी इस बड़े विवाद के बाद चुप नहीं बैठीं हैं वह लगातार पोस्ट कर रही हैं और अब उन्होंने एक और नया पोस्ट लिखकर गुस्सा उतारा है।
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Kangana Ranaut trolled after Gen Z Generation Gutter Controversy dig on CJP spokesperson Saurav Das

कंगना रनौत और सौरभ दास (Photo Source- Kangana Ranaut Instagram and CJP Protest)

Kangana Ranaut Gen Z Controversy: अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों के चलते विवादों के केंद्र में हैं। Gen Z (आज की युवा पीढ़ी) और प्रदर्शनकारी युवाओं पर की गई उनकी बेहद तल्ख और विवादित टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक संग्राम छिड़ गया है। हालांकि, चौतरफा विरोध और भारी ट्रोलिंग के बावजूद कंगना चुप बैठने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं और लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर हमले बोल रही हैं।

आखिर क्यों ट्रोल हुई कंगना रनौत?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कंगना रनौत ने CJP आंदोलन के बाद युवाओं और प्रदर्शनकारियों के सोशल मीडिया रील्स पर भड़ास निकाली। उन्होंने उन्हें "जनरेशन गटर" (Generation Gutter) और "सड़क छाप" कहा था। कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लिखा कि ऐसे रील्स देखकर उन्हें उल्टी जैसा महसूस होता है और सवाल उठाया कि इन्हें कौन जन्म दे रहा है और कैसी परवरिश दे रहा है। उन्होंने युवा महिलाओं को लेकर भी आपत्तिजनक बातें कहते हुए लिखा कि बिना जवाबदेही के आजादी का झूठा दिखावा करने वाले लोग सिर्फ "गटर छाप" हैं। एक्ट्रेस के इस कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई।

बॉलीवुड स्टार्स ने भी कंगना पर उतारा गुस्सा

कंगना के इस बयान के सामने आते ही इंटरनेट पर नेटिजन्स और युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर लोगों ने कंगना को आड़े हाथों लेते हुए उनकी भाषा के स्तर और गरिमा पर सवाल उठाए। यूजर्स ने उन्हें एक सांसद की जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इस तरह से नीचा दिखाना बेहद शर्मनाक है। सोनू सूद समेत कई मशहूर हस्तियों और नेताओं ने भी उनके इस बयान पर ऐतराज जताया। संगीतकार विशाल ददलानी ने कहा, ’बुरी भाषा!? तुमने सड़कों पर बच्चों को पीटा, उन पर पत्थर फेंके, उन्हीं को दोषी ठहराते रहे हो! उन पर गोलियां चलाते हो। उन पर आंसू गैस छोड़ते हो। उनके चेहरों पर पैलेट गन चलाते हो। तुम्हारे किराए के गुंडे अभी भी घूम-घूमकर उन्हें धमका रहे हैं और पीट रहे हैं! ये गालियां तुमने खुद कमाई हैं, मेरे दोस्त।’ इस पोस्ट के कैप्शन में विशाल ने लिखा, ‘और पेड स्टोरी-कैंपेन और इन्फ्लुएंसर कैंपेन चलाने से आप और भी दयनीय लगते हैं।" लोग विशाल ददलानी के इस पोस्ट को सपोर्ट करने लगे।

सौरभ दास का तीखा पलटवार

वहीं, युवा आंदोलन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कंगना के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। ANI और मीडिया से बात करते हुए सौरभ दास ने कहा, "कंगना रनौत को उनकी खुद की पार्टी के लोग ही ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते, तो हम या देश की Gen Z उन्हें क्यों सीरियसली ले? किसी भी जनप्रतिनिधि को अपनी भाषा की मर्यादा और पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। इस देश के युवाओं ने लोकतंत्र पर विश्वास जगाने का काम किया है।"

कंगना का पलटवार: लगातार जारी हैं पोस्ट

सौरभ दास और अन्य ट्रोल्स के हमलों के बाद भी कंगना पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। एक के बाद एक कई और पोस्ट शेयर कर कंगना रनौत ने पलटवार किया है। सौरभ दास की उम्र और पहचान पर सवाल उठाते हुए कंगना ने लिखा, "28 साल की उम्र में मैं 2 राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी थी। जो लोग बेरोजगार और नाकाम हैं, वह काम की कीमत क्या समझेंगे?"

इतना ही नहीं, कंगना ने न्यूटन का तीसरा नियम (Action and Reaction) कोट करते हुए लिखा कि अगर प्रदर्शनकारी सड़कों पर गलत भाषा बोलेंगे या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएंगे, तो उन्हें जनता से जवाब सुनने के लिए भी तैयार रहना होगा। कंगना के इन लगातार आ रहे पोस्ट्स ने इस विवाद की आग को और ज्यादा भड़का दिया है।

मीडिया पर कंगना रनौत का तंज

वहीं, अब कंगना रनौत ने एक और नया पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने एक मीडिया पर कटाक्ष करते हुए कहा, "अब आपको बुरा क्यों लग रहा है? बस इसलिए कि मैंने आपसे कहा कि आप अपनी बातों पर अमल करें? आपने साफ कहा था कि विरोध करने वाली महिलाओं पर शालीनता का बोझ नहीं होना चाहिए। तो अगर मैं आपसे भी वैसी ही 'अशालीनता' दिखाने को कहूं, जैसी उन प्रदर्शनकारियों ने दिखाई थी जिनका आप जोरदार समर्थन करती हैं, तो आपको बुरा क्यों लगता है? क्या यह पाखंड नहीं है? आप जैसी महिलाएं 'फेमिनिस्ट' शब्द को खोखला और बेमतलब बना देती हैं। अब विक्टिम कार्ड खेलना बंद कीजिए। मैं महिलाओं का सम्मान करती हूं, लेकिन उन महिलाओं का नहीं जो युवा और नासमझ बच्चों को गुमराह करती हैं।"