
स्वरा भास्कर ने रानी पद्मावत के जौहर सीन पर दिया विवादित बयान (Photo Source- Twitter/@jaganmitthya)
Senior Journalist comment on swara bhaskar jauhar remark: स्वरा भास्कर इन दिनों अपने बेबाक बयानों को लेकर विवाद में फंसी हुई हैं। उन्होंने हाल ही में फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर सीन पर आपत्ति जताई थी और उसे रेप का नाम दिया था। जिसके चलते उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। उनके खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं। अब ऐसे में एक टीवी डिबेट शो में स्वरा भास्कर के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने ऐसा बयान दिया जो वायरल हो गया। उन्होंने कहा कि स्वरा भास्कर अगर उस समय होतीं तो खिलजी के साथ भी लिव-इन में रह सकती थीं।
सोशल मीडिया पर लाइव डिबेट शो की एक क्लिप वायरल हो रही है। जो JanHit Voice नाम के पेज ने शेयर की है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि डिबेट के दौरान, ऐतिहासिक संदर्भों और सामाजिक व्यवस्थाओं पर चर्चा हो रही थी, वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने अभिनेत्री स्वरा भास्कर की वैचारिक सोच पर तीखा हमला बोला। चर्चा के दौरान उन्होंने मध्यकालीन इतिहास, खिलजी और बिन कासिम जैसे शासकों के दौर का उल्लेख करते हुए अभिनेत्री के विचारों की आलोचना कर डाली।
पत्रकार ने अपनी टिप्पणी में कहा, "मुझे लग रहा है कि ये जो स्वरा भास्कर हैं ये एक ऐसी सोच और प्रजाति की महिला हैं कि अगर ये उस समय में होती तो खिलजी और बिन कासिम के साथ लिव-इन में रहना शुरू कर देतीं। बोलतीं हम तो तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे और इसमें समस्या क्या है ये भी तो बादशाह है। इसको एक स्थाई हलाला मान लेंगे चलने दो ये जो चल रहा है। जहां शादी ब्याह इतना सरल हो, वहां क्या है इन बातों पर चर्चा होगी। इनकी सोच ही अलग है। इसी वजह से ये ऐसे बयान देते हैं।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए, पत्रकार ने मध्यकालीन इतिहास के कई उदाहरण भी दिए और दावा किया कि उस दौर में सत्ता और धार्मिक गुरुओं के बीच कैसे तालमेल होता था। उन्होंने मुगल काल और उससे पहले के शासकों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि धर्मगुरुओं ने कई मौकों पर शासकों की सहूलियत के हिसाब से नियमों की व्याख्या की।
हालांकि, बहस के दौरान जिस तरह से ऐतिहासिक प्रथाओं को आधुनिक व्यक्तियों से जोड़ा गया, उसकी कई समीक्षकों ने आलोचना की है। आलोचकों का मानना है कि किसी राजनीतिक या वैचारिक असहमति को व्यक्त करने के लिए ऐतिहासिक कुरीतियों का सहारा लेकर किसी महिला पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना टीवी पत्रकारिता के मानकों के अनुकूल नहीं है।
डिबेट का यह हिस्सा वीडियो क्लिप के रूप में सोशल मीडिया पj वायरल हो गया, जिसके बाद इंटरनेट पर दो स्पष्ट धड़े देखने को मिल रहे हैं।
समर्थक पक्ष: एक वर्ग का मानना है कि पत्रकार ने तीखे लहजे में ही सही, लेकिन वामपंथी या तथाकथित उदारवादी विचारधारा की ऐतिहासिक चयनात्मकता पर हमला बोला है।
विरोधी पक्ष: वहीं, एक बड़ा वर्ग इसे महिलाओं के लिए अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करार दे रहा है। उपयोगकर्ताओं का कहना है कि किसी भी नागरिक या कलाकार के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन न्यूज रूम में इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना स्तर को गिराता है।
फिलहाल, इस पूरे विवाद और वायरल वीडियो पर अभिनेत्री स्वरा भास्कर या संबंधित टीवी नेटवर्क की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने प्राइम टाइम डिबेट्स में भाषा की सीमा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। वहीं, इस पूरे मामले के बाद स्वरा भास्कर ने सफाई भी दी थी। उन्होंने बताया था कि उनकी स्पीच को गलत ट्रांसलेट कर उसका खराब मतलब निकाला गया।
Updated on:
4 Sep 2026, 7:25 AM IST
Published on:
4 Sep 2026, 7:14 AM IST
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