
सिकंदर खेर ने अपने डेब्यू और माता-पिता पर की बात (Photo Source- Instagram/sikandarkher/anupamkher)
Sikandar Kher On Nepotizm: बॉलीवुड में 'नेपोटिज्म' यानी भाई-भतीजावाद को लेकर किरण खेर और अनुपम खेर के बेटे सिकंदर खेर ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि हमेशा लोगों को लगता है कि स्टारकिड्स की जिंदगी बेहद आसान और अच्छी होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। इस धारणा को सिरे से खारिज करते हुए सिकंदर ने खुलासा किया है कि उनके माता-पिता ने आज तक उनके करियर के लिए किसी भी डायरेक्टर या प्रोड्यूसर से सिफारिश नहीं की।
सिकंदर खेर ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने नेपोटिज्म पर बात की। उन्होंने बताया कि 2008 में हंसल मेहता की फिल्म 'वुडस्टॉक विला' से मैंने अपने अभिनय की शुरुआत की थी और वह बिना किसी पारिवारिक सिफारिश के इंडस्ट्री में आगे बढ़े। अपनी पहली फिल्म के क्रेडिट्स में उन्होंने अपना सरनेम (खेर) भी नहीं जोड़ा था, ताकि वह अपनी खुद की पहचान बना सकें।
सिकंदर खेर ने कहा, "मुझे नहीं पता कि मेरे साथ नेपोटिज्म हुआ है या नहीं, लेकिन मेरे माता-पिता ने पूरी जिंदगी कभी किसी से मेरी सिफारिश नहीं की। मुझे लगता है कि ऐसा करने में उन्हें शर्म आती है। उन्होंने कभी किसी डायरेक्टर से जाकर यह नहीं कहा कि 'मेरे बेटे को अपनी फिल्म में काम दे दो'।”
सिकंदर ने आगे कहा, “इंडस्ट्री में कई लोग अपने बच्चों के लिए काम मांगते होंगे, लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरे लिए बिल्कुल नहीं किया। उन्होंने कभी शर्त नहीं रखी कि अगर आप हमें कास्ट कर रहे हैं, तो हमारे बेटे को भी फिल्म में लें।"
सिकंदर खेर के कहा कि फिल्मी परिवार से जुड़े होने का मतलब हमेशा आसान रास्ता नहीं होता। उन्होंने बताया कि जिस परिवार से पहचान मिलती है, वही कड़ी जांच का कारण भी बन सकती है। सिकंदर का मानना है कि जनता स्टारकिड्स की एक्टिंग को देखने से पहले ही उनके बारे में अपनी राय बना लेती है।
सिकंदर ने आगे मशहूर हॉलीवुड अभिनेता निकोलस केज का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे उन्होंने अपने अंकल फ्रांसिस फोर्ड कोपोला का नाम हटाकर 'केज' सरनेम अपनाया था ताकि उन्हें अपने दम पर पहचाना जाए और वह खुद की एक पहचान बना पाएं।
अभिनेता ने कहा कि स्टार किड्स को हमेशा एक अलग तरह के दबाव का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि दर्शक अक्सर उनकी अपेक्षाओं के साथ उनके काम को देखते हैं। उनके मामले में उन्होंने महसूस किया कि लोग खास यह जानने में रुचि रखते थे कि क्या वह स्वतंत्र रूप से खुद की पहचान बना सकते हैं। वे पहले से बनी धारणाओं के साथ आते हैं और आपको नीचे गिराना चाहते हैं। मुझे लगता है कि कई लोगों ने मुझे देखकर सोचा होगा, 'देखते हैं कि अनुपम और किरण का बेटा क्या करता है!' ऐसी स्थितियों में, दर्शकों के सामने खुद को साबित करने में समय लगता है क्योंकि आप पर कड़ी नजर रखी जाती है।”
Updated on:
02 Sept 2026 01:48 pm
Published on:
02 Sept 2026 01:38 pm
