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सोनाली कुलकर्णी का खुलासा, बोलीं- ‘तब्बू की जीत पर हुई थी जलन, लगा ‘इंडस्ट्री कनेक्शन’ की वजह से मिला नेशनल अवॉर्ड

Sonali Kulkarni Tabu National Award: एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी खुलासा किया कि 1994 में 'माचिस' फिल्म के लिए तब्बू को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर उन्होंने इसे इस बात से जोड़ा था कि तब्बू "इंडस्ट्री से थीं", यानी शबाना आजमी की भतीजी थीं।
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मुंबई

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Rashi Sharma

Jun 26, 2026

Sonali Kulkarni

सोनाली कुलकर्णी ने तब्बू को लेकर किया खुलासा। (फोटो सोर्स: IMDb)

Sonali Kulkarni: 90 के दशक की 'कुली नंबर 1' और 'जीत' जैसी फिल्मों से बतौर कमर्शियल स्टार के तौर पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने वाली तब्बू को 1997 में, तब्बू को गुलजार की फिल्म 'माचिस' में जबरदस्त एक्टिंग के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का पहला नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड मिला था और ये फिल्म उनके एक्टिंग करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी। जहां, एक और 'माचिस' फिल्म की सफलता ने तब्बू की बेहतरीन एक्टिंग को दिखाया। वहीं, उस दौर की उम्दा एक्ट्रेसेस की रेस में सोनाली कुलकर्णी भी शामिल थीं जिन्हें अमोल पालेकर की फिल्म 'दायरा' के दमदार रोल के लिए काफी तारीफें मिली थीं। हाल ही में अपने उस दौर को याद करते हुए सोनाली ने बताया कि नेशनल अवॉर्ड नहीं मिलने के बाद उन्हें अपना करियर खतरे में नजर आने लगा था। उन्होंने माना कि ये अवॉर्ड न मिलने पर उन्हें गुस्सा और निराशा महसूस हुई थी।

हर साल नेशनल अवॉर्ड की उम्मीद लगाती थीं सोनाली कुलकर्णी

हाल ही में एक इंटरव्यू में सोनाली कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें उन सभी लोगों से जलन होती थी जो उस समय अवॉर्ड जीत रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी कई फिल्में लगातार नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के फाइनल राउंड तक पहुंचती थीं, लेकिन हर साल जब उनको ये अवॉर्ड नहीं मिलता था तो बहुत निराशा होती थी। हालांकि, उसी टाइम उन्हें दूसरे अवॉर्ड्स से पहचान मिल रही थी, लेकिन उन्होंने माना कि नेशनल अवॉर्ड ही वो सम्मान था जिसे वो सबसे ज्यादा पाना चाहती थीं, इसलिए हर बार हार को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो जाता था।

मुझे तब्बू से जलन और गुस्सा था

उस समय को याद करते हुए, सोनाली ने बताया कि 1997 में जब तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला और वो इस अवॉर्ड से चूक गईं, तो उनके मन में विचार आया था कि तब्बू "इंडस्ट्री से थीं", यानी शबाना आजमी की भतीजी थीं। उन्होंने आगे कहा, "मुझे तब्बू से इतनी जलन और गुस्सा था कि आखिरकार मैंने 'माचिस' फिल्म देखी। उनकी फिल्में देखकर मुझे अपनी बेचैनी से निपटने में मदद मिली। उनकी एक्टिंग से न सिर्फ मुझे खुशी मिली, बल्कि उसमें इतनी काबिलियत थी कि मुझे अपनी जिंदगी और अपनी क्षमताओं को समझने और स्वीकार करने में मदद मिली। जब मैंने तब्बू की कई फिल्में देखीं, जैसे 'माचिस', 'अस्तित्व' और 'चांदनी बार', तो हर बार मुझे उनसे और ज्यादा प्यार होता चला गया।"

2002 में मिला स्पेशल जूरी अवॉर्ड का नेशनल अवॉर्ड

बता दें कि सोनाली कुलकर्णी को 2002 में क्रांति कनाडे की मराठी शॉर्ट फिल्म 'चैत्र' के लिए स्पेशल जूरी अवॉर्ड के तौर पर नेशनल अवॉर्ड मिला, लेकिन तब से उनकी उम्मीदें और लक्ष्य बदल गए हैं। अब किसी और अवॉर्ड के पीछे भागने के बजाय, यह एक्ट्रेस तब्बू के साथ काम करना चाहती हैं; उन्होंने बताया कि इस मशहूर स्टार के साथ काम करना उनकी विश लिस्ट में सबसे ऊपर है।