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मेहनतकश हाथों के घर कई बार नहीं जलते दीए, लेकिन इस दिवाली मिट्टी के दीए बनाने वालों को हैं काफी उम्मीद

प्लास्टिक और चाइनीज बाजार ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया है जिसकी वजह से उनके रोजी-रोटी पर भी संकट मंडराने लगता है।

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Diwali 2018

मेहनतकश हाथों के घर कई बार नहीं जलते दीए, लेकिन इस दिवाली मिट्टी के दीए बनाने वालों को हैं काफी उम्मीद

बुलंदशहर। करवाचौथ और दीपावली केस त्योहार को बस कुछ दिन हैं। जैसे-जैसे त्योहार पास आ रहे हैं वैसे-वैसे मिट्टी के दीए और बर्तन बानने वालों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार लोग मिट्टी के दीए का प्रयोग करेंगे और ये कारीगर भी अपना त्योहार खुशी से मना सकेंगे। लेकिन कितने लोग हैं जोे इस बार इन दीयो से अपना घर आंगन संजाएंगे या पूजा में प्रयोग करेंगे।

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कच्ची मिट्टी को आकार देने वाले मेहनत कश हाथ हर साल बड़े ही प्यार से और मेहनत से तरह-तरह के दीए बनाते हैं। दीए बनाने वालों को एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इस बार त्योहार के मौके पर करवा चौथ में इस्तमाल होने वाला मुख्य पात्र करवा और दीया उनकी जिंदगी में भी उजाला और खुशियां ले कर आएगा। इसी उम्मीद में करवे बनाने का काम भी अंतिम चरण में चल रहा,मिट्टी के कारीगर एक माहीने से इस काम में लगे हुए हैं, और खास तौर पर करवे तैयार कर रहे हैं।

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वहीं दिवाली के त्योहार को भी मद्देनजर रखते हुए काम कर रहे हैं ,हालांकि इनका साफ तौर पर मानना है प्लास्टिक और चाइनीज आइटम ने इनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन बावजूद इसके सभी का लक्ष्य एक ही है कि वे भी तरह-तरह की डिजायन के दीए बना कर अपने काम के बल पर लोगों को अपनी ओर लुभा सकें। बुलन्दशहर नगर क्षेत्र में अभी भी कुछ चुनिंदा परिवार इस पुश्तैनी काम को सम्भाले हुए हैं,जो गरीबी और मुफ़लिसी के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन त्योहार है तो एक इन कारीगरों को उम्मीद है कि कहीं न कहीं ये उनके लिए उपयोगी सिद्ध होगा ,इसी उम्मीद पर ये आगे बढ़ रहे हैं।

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मिट्टी को आकार देने वाले ये कारीगर अपनी जीविका चलाने को इस काम में मन लगाकर मेहनत के साथ काम करते हुए देखे जा सकते हैं। जिससे उनके घरों में भी त्योहार की रोशनी दस्तक दे सके और मुरझाए परिवारों के चेहरों पर भी खुशी आ सके। लेकिन इस काम में लगे लोगों का कहना है कि प्लास्टिक और चाइनीज बाजार ने उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया हुआ है, जिसकी वजह से उनके उपर संकट बना रहता है, हालांकि त्योहार पर उन्हें भरोसा ही कि कुछ तस्वीर बदलेगी और उनके अच्छे दिन आएंगे।

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