विमंदित बेटियों तक नहीं पहुंच पा रही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना

सरकार विमंदित महिलाओं को दी जाने वाली सहायता की योजनाओं का तो खूब ढिंढोरा पीटती है, लेकिन हकीकत में कई पात्रों को योजनाओं से वंचित रख दिया जाता है।

By: Narendra Agarwal

Updated: 03 Jul 2021, 05:58 PM IST

नैनवां. सरकार विमंदित महिलाओं को दी जाने वाली सहायता की योजनाओं का तो खूब ढिंढोरा पीटती है, लेकिन हकीकत में कई पात्रों को योजनाओं से वंचित रख दिया जाता है। ऐसा ही नैनवां कस्बेे के राजीव कॉलोनी की दो बहनें 40 वर्ष की शबनम व 35 वर्ष की सन्नू के साथ हो रहा है। जन्म से ही विमंदित होने के बाद भी उन तक राहत की कोई योजना नहीं पहुंच पाई। दोनों बहनें न चल सकती है और न ही बोल पाती। फिर भी विमंदितों को मिलनेे वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहायता से दूर कर रखा है।
दिव्यंागता प्रमाण पत्र नहीं बन पाने से न उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वीकृत हो पाती और न ही अन्य योजनाओं को लाभ मिल पाता। मां शमा ने बताया कि दोनों बेटियों के प्रमाणपत्र बनाने के लिए समाज कल्याण द्वारा लगाए शिविरों में लेकर भी गई, लेकिन कभी चिकित्सक नहीं आने से तो कभी सक्षम अधिकारी नहीं आने से प्रमाणपत्र नहीं बना पाए।

वृद्ध मां ही सहारा...
विमंदित बेटियों की स्थिति को बताते हुए 60 वर्षीय मां शमा की आंखें छलक पड़ी। छलकती आंखों से बोली कि दोनों बेटियां जन्म से ही विमंदित होने से विवाह नहीं कर पाए। बुढ़ापे में सहारा बनती लेकिन उसके बजाए बेटियों को सहारा देना पड़ रहा है। दोनों ही बेटियों के जन्म सेे ही विमंदित व दिव्यांग होने से मां शमा बानो को चालीस वर्ष की शबनम व 35 वर्ष की सन्नू का शिशुओं की तरह ख्याल रखना पड़ रहा है। पिता असलम पंक्चर की दुकान लगाता है। जिसकी माली हालत ठीक नहीं है। एक कमरे के मकान में ही पूरा परिवार को बसर करना पड़ रहा है।

Narendra Agarwal Desk
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