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मुझसे शादी करोगे तो मुझे यहां से ले जाओ… जिस्मफरोशी के जाल में फंसी लक्ष्मी की प्रेम कहानी

सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय की एक बस्ती की युवती को अपने ही परिजनों ने 13 वर्ष की उम्र में देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया और अब जब बालिग होने के बाद वह अपना घर बसाने को तैयार हुई तो दीवार बनकर खड़े हो गए हैं। युवती को कहीं कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। हालांकि उसने इस दलदल से निकलने का पूरा मन बना लिया है। अपना नीवन साथी चुन लिया और अब उसी के साथ जीवन बिताने की ठान ली है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर


गुंजन बाकलीवाल/बूंदी । सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय की एक बस्ती की युवती को अपने ही परिजनों ने 13 वर्ष की उम्र में देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया और अब जब बालिग होने के बाद वह अपना घर बसाने को तैयार हुई तो दीवार बनकर खड़े हो गए हैं। युवती को कहीं कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। हालांकि उसने इस दलदल से निकलने का पूरा मन बना लिया है। अपना नीवन साथी चुन लिया और अब उसी के साथ जीवन बिताने की ठान ली है।

पीड़िता को कोई डर सता रहा है तो वो है उसकी 6 साल की बेटी का। जो अभी भी उसके माता-पिता के साथ रह रही है। कहीं माता-पिता उसको भी इस दलदल में नहीं धकेल देवे। प्रशासन से बेटी को बुलाने की युवती ने गुहार लगाई है। सवाईमाधोपुर के भैरु दरवाजा आलनपुर की रहने वाली लक्ष्मी (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह 13 वर्ष की थी, तब से देह व्यापार के दलदल में हैं। उसे माता-पिता,भाई-भाभी ने इस दलदल में धकेला है।

अब 30 वर्ष की उम्र में बालिग होने के बाद लक्ष्मी इस देह व्यापार को नहीं करना चाहती, लेकिन परिवारजन ही उसे इस दलदल से नहीं निकलने दे रहे हैं। जैसे-तैसे पीड़िता दलालों के चंगुल से छुटकर जयपुर से बूंदी पहुंची। उसने बूंदी के रामनगर कंजर कॉलोनी में रहने वाले बलवीर के साथ अपना घर बसाने का निर्णय किया, लेकिन लक्ष्मी को घर वालों का डर सता रहा है।

शुक्रवार को लक्ष्मी का यहां नैनवां रोड स्थित वृद्धाश्रम में हिंदू रीति-नीति के साथ विवाह होगा। कई सामाजिक संगठन जन प्रतिनिधि ओर प्रशासनिक ओर पुलिस विभाग के अधिकारी इस विवाह के साक्षी बनेंगे। नवयुगल जोड़े को घर बसाने के लिए कई सामाजिक संगठन उपहार स्वरुप घरेलु सामान भेंट करेंगे। लक्ष्मी की माने तो उसने बालिग होने के बाद से इस धंधे को करने से साफ इनकार कर दिया। अब उसने इस बुराई से लडकऱ अपना सुकून भरा जीवन जीने का निर्णय कर लिया।


गरीबी का हवाला देकर देह व्यापार में धकेला
लक्ष्मी को परिजनों ने 13 वर्ष की उम्र में सवाईमाधोपुर से नागपुर देह व्यापार के दलदल में भेज दिया। पीड़िता ने बताई की परिजनों ने कहा कि इसका कारण उन्होंने गरीबी को बताया था। इसके बाद मुम्बई फिर महाराष्ट्र के सादा गांव में इस दलदल में काम किया। बाद में बूंदी के रामनगर आने के बाद जयपुर भेज दिया।

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जयपुर से दोनों भागकर बूंदी पहुंचे
रामनगर में देह व्यापार के दौरान गांव के रहने वाले बलवीर से प्रेम हुआ। युवक गांव में खेती-बाड़ी का काम करता है। दोनों के बीच जान पहचान बड़ी और बातचीत शुरु हो गई। इसी दौरान परिजनों ने पीड़िता को जयपुर भेज दिया। यहां वो मालवीय नगर सेक्टर-11 रुकी। दीपावली के अवकाश के दौरान कोई नहीं होने से लक्ष्मी ने बलवीर को फोन कर उसे यहां से ले जाने की बात कहीं। जयपुर से दोनों भागकर बूंदी पहुंचे।

खुले आसमां मिलेगी जिदंगी
सत्रह साल से देह व्यापार के दलदल में फंसी लक्ष्मी अब अपना घर बसाकर खुले आसमां तले सुकून की जिंदगी जी सकेगी। यह होगा बूंदी के वरिष्ठ पार्षद टीकम जैन और बाल कल्याण समिति की मदद से। लक्ष्मी के हाथ पीले होंगे और वह अपने ही समाज के युवक की जीवन संगीनी बन सकेंगी। यह काम न सिर्फ ज्योति के समाज को बल्कि इस कारोबार में लिप्त लोगों को संदेश देगा।

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ऑनलाइन ही करते है सौदा
पीड़ित युवती ने बताया कि इस दलदल में खूब यातनाएं भी दी जाती है। कहीं जाने से मना करने पर मारपीट और झगड़ा करते है। ऑनलाइन ही सौदा होता है फिर दलाल के जरिए भेजते है।

देह व्यापार के दलदल में फंसी युवतियों को विवाह कराना एक पुण्य का काम है। अब तक अपनी टीम के साथ मिलकर 20 युवतियों का विवाह करा चुका हूं, आगे भी प्रयास जारी रहेगा।
टीकम जैन, पार्षद,नगर परिषद,बूंदी

कंजर समाज में व्याप्त कुप्रथा के चलते बालिकाएं देह शोषण से बाहर आना चाहती है ,इसी क्रम में प्रशासन और समाज इनके साथ खड़ा है। शुक्रवार को कंजर बालिका का विवाह करवाया जाएगा।
सीमा पोद्दार, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति