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Savings Account में बड़ी रकम कैश में जमा की है? आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस, जान लें नियम

Savings Account Rules: अगर आप बचत खाते में बडी रकम कैश में जमा करा रहे हैं, तो पैसे के सोर्स से जुड़े सबूत सुरक्षित रखें। इनकम टैक्स का नोटिस आने पर ये काम आ सकते हैं।

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Savings Account Rules

बचत खाते में ज्यादा कैश जमा करना भारी पड़ सकता है। (PC: Pixabay)

क्या आपने हाल में ही अपने सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में 15 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम को डिपॉजिट किया है? अब आप ये सोच रहे हैं कि क्या इसके लिए आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से कोई नोटिस आ सकता है। ये सवाल बीते दिनों कई प्लेटफॉर्म्स पर पूछा गया है। तो चलिए इसको जरा गहराई से समझते हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स से जब ये पूछा गया, तो उनका जवाब था कि ऐसा हो सकता है कि अगर आप अचानक से ही अपने अकाउंट में कोई बड़ा कैश जमा करें, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से आपको नोटिस आए और आपसे इस रकम के बारे में पूछा जाए। अगर इनकम टैक्स विभाग आपको ऐसा कोई नोटिस भेजता है, तो आपके पास इस रकम का सोर्स, सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स, रिकॉर्ड्स वगैरह तैयार होने चाहिए, ताकि आप ये साबित कर सकें कि जमा किया गया पैसा अवैध नहीं है।

नोटिस को लेकर क्या हैं इनकम टैक्स के नियम?

बैंक अकाउंट में बड़ी रकम जमा होने पर नोटिस क्यों आ सकता है। इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 285BA बताता है कि बैंकों को एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा होने की सूचना देना अनिवार्य है। ऐसी जमा राशि का पता चलने पर, आयकर विभाग सेक्शन 68 या 133(6) के तहत नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण और स्रोत का प्रमाण मांग सकता है। अगर आपके टैक्स रिटर्न में राशि का खुलासा नहीं किया गया है, तो सेक्शन 148 के तहत नोटिस जारी किया जा सकता है। सेक्शन 269ST के तहत कुछ लेनदेन में 2 लाख से अधिक कैश नहीं ले सकते हैं।

कितनी होगी टैक्स देनदारी?

अघोषित जमा पर सेक्शन 68 या सेक्शन 69A के तहत टैक्स लगाया जा सकता है। अगर इस कैश जमा को आप वैध साबित नहीं कर पाते हैं तो 25% सरचार्ज और 6% जुर्माने के साथ 60% का टैक्स लगाया जाता है, जिससे कुल टैक्स देनदारी 84% हो जाती है। ऐसी आय पर कोई कटौती या छूट नहीं दी जाती है। इसलिए बिक्री रसीदें, गिफ्ट्स की डिटेल या बैंक निकासी प्रमाण जैसे दस्तावेजों को सबूत के तौर पर रखना जरूरी है।

आपके बड़े लेन-देन पर नजर

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से आपका कोई लेन-देन छिपा हुआ नहीं रहता है। विभाग कई तरीकों से आपके बड़े लेनदेन पर कड़ी नजर रखता है।

  • अनुअल इन्फॉर्मेशन रिटर्न (AIR)
  • स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस (SFT)
  • टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्सेस (TDS)
  • टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्सेस (TCS)
  • इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग्स

बड़े डिपॉजिट्स को लेकर ये बातें ध्यान रखें

अगर आप 50,000 रुपये से ज्यादा कैश जमा करते हैं, तो PAN देना अनिवार्य है। अगर बचत बैंक खातों में एक वित्त वर्ष के दौरान जमा राशि 10 लाख रुपये से ज्यादा है तो बैंक वित्तीय लेनदेन विवरण (Statement of Financial Transactions-SFT) के जरिए उन्हें चिह्नित करते हैं। अगर आयकर रिटर्न में ऐसी आय उचित रूप से नहीं दिखाई देती है, तो टैक्स चोरी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

आपको सभी बड़े-लेन देन का और उसके सोर्स का सटीक तरीक से रिकॉर्ड रखना चाहिए। तय सीमा से ज्यादा ट्रांजैक्शन हमेशा बैंकिंग के जरिए उचित तरीके से किए जाने चाहिए, कुछ भी छिपाकर नहीं होना चाहिए और जब भी ITR फाइल करें इसका जिक्र जरूर करें।

पैसों के सोर्स से जुड़ी पारदर्शिता जरूरी

देखिए, बचत खाते में 15 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम जमा करना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इससे कंप्लायंस से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। आयकर विभाग के जुर्माने या नोटिस से बचने के लिए समय पर रिपोर्टिंग, वैध दस्तावेज और पैसों के स्रोत के बारे में पारदर्शिता ज़रूरी है। जहां तक संभव हो, ज्यादा बड़े अमाउंट्स को लेने से बचें, क्योंकि ये बेवजह आपके लिए सिरदर्द बन सकते हैं।