
पति अगर पत्नी के खाते में पैसा डाल रहा है, तो इनकम सोर्स क्लीयर होना चाहिए। (PC: AI)
Double Taxation Rules: अगर पति अपनी कमाई पर टैक्स भर चुका है और बाद में उसी पैसे को पत्नी को दे देता है, तो क्या पत्नी के खाते में पहुंचते ही वही रकम फिर से टैक्स के दायरे में आ सकती है? पुणे इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के एक मामले में ठीक यही सवाल उठा। 71.56 लाख रुपये की रकम को लेकर आयकर विभाग और एक दंपती के बीच विवाद हुआ। जिसे अब ITAT ने दंपती के पक्ष में फैसला देकर खत्म किया है।
यह मामला जयेंद्र नावले और उनकी पत्नी गौरी नावले का है, जो असेसमेंट ईयर (AY) 2016-17 से जुड़ा है। ITAT ने 14 अगस्त को दिए अपने आदेश में पति और पत्नी, दोनों के खिलाफ किये गए 71.56 लाख रुपये के addition को हटा दिया। दरअसल यह पैसा गौरी नावले को उनके पति जयेंद्र ने दिया था। इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस रकम के सोर्स पर सवाल उठाए। ट्रिब्यूनल में गौरी ने इसे पति की तरफ से मिला गिफ्ट बताया था।
विभाग द्वारा जब सोर्स की जानकारी मांगी गई तो गौरी ने बताया कि यह रकम उसे अपने पति से मिली है। वहीं, पति ने यह इनकम समृद्ध जीवन मल्टीस्टेट मल्टीपर्पस को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड से मिलने वाले कमीशन से बताई थी। इसके बाद आकलन अधिकारी (AO) इस कमीशन इनकम के सोर्स से संतुष्ट नहीं थे। खासतौर पर इसलिए क्योंकि सोसाइटी ने सेक्शन 194H के तहत कमीशन पर TDS नहीं कटा था। इसी वजह से AO ने पूरी 71.56 लाख रुपये की रकम को सेक्शन 69A के तहत बिना हिसाब-किताब वाली रकम मान लिया। बाद में CIT(A)/NFAC ने भी इस एडिशन को बरकरार रखा, जिसके बाद मामला ITAT पहुंचा।
इस मामले में ITAT के सामने जयेंद्र नवाले ने अपने आय का रिकॉर्ड रखा। TaxGuru की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2016 को समाप्त वर्ष के लिए उनके प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में करीब 91.74 लाख रुपये की रकम सेल्स के तौर पर दिखाई गई थी। जयेंद्र ने इसे सोसायटी से मिली कमीशन आय बताया था। उन्होंने कटौतियों के बाद करीब 93.67 लाख रुपये की कुल आय घोषित की थी। यानी जिस रकम को पत्नी के खाते में जमा किए जाने पर बिना हिसाब किताब का पैसा बताया गया था, उससे पहले पति की घोषित आय का रिकॉर्ड मौजूद था। इससे ITAT ने देखा कि जयेंद्र के पास पत्नी को 71.56 लाख रुपये देने की क्षमता थी। ऐसे में ट्रिब्यूनल के अनुसार, एक ही रकम को पति की घोषित और टैक्स की गई आय से जोड़ने के बाद उसे पत्नी के हाथ में फिर से देने पर बिना हिसाब किताब कि रकम मानकर टैक्स लगाना उचित नहीं है।
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि पति अगर पत्नी के बैंक खाते में कोई भी रकम जमा कर दे तो उस रकम पर कभी टैक्स नहीं लग सकता। ITAT का फैसला इस खास मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, आय के रिकॉर्ड और रकम के स्रोत से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। अगर पति-पत्नी के बीच बड़ी रकम का लेनदेन होता है, तो जरूरत पड़ने पर यह साबित करना महत्वपूर्ण हो सकता है कि पैसा कहां से आया, पैसा देने वाले की आय क्या थी, क्या उसने वह आय अपने Income Tax Return में दिखाई थी और क्या उसके पास इतनी रकम देने की वित्तीय क्षमता थी।
Updated on:
18 Aug 2026 02:26 pm
Published on:
18 Aug 2026 02:26 pm
