
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा। (PC: AI)
Jio IPO Launch Date: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के लिए 21 अक्टूबर को खुलने जा रहा है। कंपनी ने इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू के जरिए कंपनी करीब 28,755 करोड़ रुपये से 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। अगर तय योजना के मुताबिक यह आईपीओ आता है, तो रुपये में आकार के लिहाज से यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। जियो प्लेटफॉर्म्स ने बुधवार को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जमा कराया है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर प्रस्तावित है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा। इसमें कंपनी अधिकतम 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, यानी इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा नहीं है। कंपनी ने पहले ड्राफ्ट दस्तावेजों में करीब 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना पेश की थी। अब इश्यू का आकार घटाकर अधिकतम 30,213 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह शुरुआती प्रस्ताव से करीब 14% कम है। इसके बावजूद यह IPO भारत के अब तक के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू का रिकॉर्ड बना सकता है। फिलहाल यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने 2024 में करीब 27,870 करोड़ रुपये का IPO पेश किया था।
जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे। इसके बाद 12-12 शेयरों के गुणक में आवेदन किया जा सकेगा। प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी ने पात्र कर्मचारियों के लिए भी छूट की घोषणा की है। कर्मचारी आरक्षण वाले हिस्से के तहत बोली लगाने वाले योग्य कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट मिलेगी।
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा अपनी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी। प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, कंपनी इस मद में अधिकतम 27,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। आईपीओ के मैनेजमेंट के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया और गोल्डमैन सैक्स इंडिया समेत कई वित्तीय संस्थानों को बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इसके अलावा कई वैश्विक निवेशकों ने भी कंपनी में पैसा लगाया हुआ है।
| निवेशक | जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी |
|---|---|
| रिलायंस इंडस्ट्रीज | 66.43% |
| मेटा प्लेटफॉर्म्स | 9.98% |
| गूगल इंटरनेशनल | 7.73% |
| KKR | 2.31% |
| विस्टा इक्विटी पार्टनर्स | 2.31% |
| सिल्वर लेक | 1.88% |
| मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी | 1.85% |
| जनरल अटलांटिक | 1.34% |
| अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी | 1.16% |
मेटा की हिस्सेदारी उसकी सहयोगी कंपनी Jaadhu Holdings LLC के जरिए है। वहीं, गूगल की हिस्सेदारी Google International LLC के माध्यम से है। KKR, विस्टा और सिल्वर लेक समेत अन्य निवेशकों ने भी अपनी सहयोगी कंपनियों या फंड के जरिए निवेश किया है।
इन्वेस्टर गेन के अनुसार, गुरुवार सुबह जियो प्लेटफॉर्म का शेयर ग्रे मार्केट में 203 रुपये या 18.14 फीसदी के प्रीमियम पर ट्रेड करता दिखाई दिया। जीएमपी के आधार पर शेयर की लिस्टिंग 1322 रुपये पर हो सकती है। हालांकि, यह सिर्फ अनुमान है। जीएमपी रिटर्न की गारंटी नहीं देता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स की कारोबारी संभावनाएं अच्छी हैं, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन और मार्केट रिस्क को समझना जरूरी है। सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, कंपनी के बढ़ते कारोबार और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को देखते हुए निवेशक इस आईपीओ पर विचार कर सकते हैं। टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर, टावर कनेक्टिविटी और नेटवर्क क्षमता में निवेश से कंपनी की सेवाओं की पहुंच मजबूत हो सकती है।
गुप्ता का मानना है कि कंपीटीटर्स के मुकाबले किफायती इंटरनेट सेवाएं देने पर जियो का जोर उसे नए ग्राहक जोड़ने और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है। डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट की बढ़ती मांग भी कंपनी के लंबे समय के कारोबार के लिए फायदेमंद हो सकती है।
वहीं, कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च एंड बिजनेस डेवलपमेंट) महेश एम. ओझा ने भी लॉन्ग टर्म के नजरिए से जियो आईपीओ पर विचार करने की सलाह दी है। ओझा के अनुसार, टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं में जियो की मजबूत मौजूदगी के साथ एआई, क्लाउड और एंटरप्राइज सर्विसेस जैसे सेक्टर्स में विस्तार की संभावनाएं कंपनी को लंबे समय में बेहतर परफॉर्म करने का मौका दे सकती हैं। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को आईपीओ के वैल्यूएशन और बाजार के जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
15 Oct 2026 12:04 pm
Published on:
15 Oct 2026 12:04 pm
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