
कॉरपोरेट एनपीएस स्कीम
नेशनल पेंशन सिस्टम यानी (NPS) सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाल लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट प्लान है। लेकिन अभी भी लोग इससे जुड़े बुनियादी सवाल पूछते हैं और कई गलतफहमियां भी होती हैं। लाखों लोग यह मानते हैं कि National Pension System (NPS) में जमा किया गया पूरा पैसा शेयर बाजार में लगा दिया जाता है और बाजार गिरा तो सारी जमापूंजी डूब जाएगी। इसी के चलते कई लोग एक बेहतरीन रिटायरमेंट स्कीम से दूर रह जाते हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि सरकार ने NPS से जुड़े नए नियम लागू किए हैं जो इसे और भी फायदेमंद बनाते हैं।
NPS एक लंबी अवधि की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसे Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) रेगुलेट करता है। इसके तहत आप नौकरी के दौरान थोड़ा-थोड़ा पैसा नियमित रूप से निवेश करते है और रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है उसके बाद आपको पेंशन के रूप में आय मिलती रहती है।
इस स्कीम में भारत का कोई भी नागरिक 18 से 70 साल की उम्र के बीच अपना अकाउंट खोल सकता है, बशर्ते KYC प्रक्रिया पूरी हो। यह सरकारी कर्मचारियों, प्राइवेट नौकरी करने वालों और खुद का काम करने वाले (self-employed) सभी लोगों के लिए उपलब्ध है।
NPS एक डाइवर्सिफाइड रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट स्कीम है जिसे PFRDA यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी रेगुलेट करती है। इसमें आपका पैसा चार एसेट क्लास में बांटा जाता है।
NPS में पैसा लगाने के दो तरीके हैं। एक्टिव च्वाइस में आप खुद तय करते हैं कि कितना पैसा इक्विटी में और कितना डेट में जाएगा। इक्विटी में अधिकतम 75 फीसदी तक निवेश किया जा सकता है। ऑटो च्वाइस में उम्र के हिसाब से ऑटोमेटिक बंटवारा होता है। जब उम्र कम होती है तो इक्विटी एक्सपोजर ज्यादा रहता है और जैसे-जैसे रिटायरमेंट पास आती है डेट का हिस्सा बढता जाता है।
22 अप्रैल 2026 को सरकार ने ऑल इंडिया सर्विसेज के लिए NPS के नए नियम नोटिफाई किए हैं। इन नियमों के तहत अब डिजिटल प्रोसेस को अनिवार्य कर दिया गया है और कंट्रीब्यूशन जमा करने में देरी होने पर डिपार्टमेंट को ब्याज देना होगा। कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और DA का 10 फीसदी NPS में देते हैं जबकि सरकार 14 फीसदी का योगदान करती
इसके अलावा विदड्रॉल के नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। पहले सब्सक्राइबरों को आम तौर पर रिटायरमेंट कोष का 60% तक हिस्सा एकमुश्त (lump sum) के रूप में निकालने की अनुमति होती थी, जबकि शेष 40% का उपयोग रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन आय के लिए 'एन्युइटी' (वार्षिकी योजना) खरीदने में करना अनिवार्य होता था। लेकिन अब जिन सब्सक्राइबरों का जमा कोष 12 लाख रुपये से अधिक है, वे रिटायरमेंट पर 80 फीसदी तक लंपसम निकाल सकते हैं और सिर्फ 20 फीसदी से एन्युटी खरीदनी होगी।
इसके साथ ही वेस्टिंग पीरियड (निश्चित अवधि) को कम कर दिया गया है। अब सब्सक्राइबर 15 साल तक पैसा जमा करने या 60 साल की आयु पूरी होने पर स्कीम से बाहर निकल सकते हैं। एक और राहत देते हुए पहले के अनिवार्य 5 साल के लॉक-इन पीरियड को हटा दिया गया है।
Published on:
25 Apr 2026 02:24 pm
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