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Sugar Price Today: भारत में चीनी भेजकर अपनी दशा सुधारने के सपने देख रहीं पाकिस्तानी मिलें, क्या निकल पाएगा कोई रास्ता?

India Pakistan Sugar Trade: भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके बाद पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री ने अपने 12 लाख टन से ज्यादा सरप्लस स्टॉक को भारत में बेचने की संभावना तलाशने की मांग की है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Aug 21, 2026

pakistan surplus sugar

पाकिस्तानी मिलें भारत में चीनी बेचना चाहती हैं। (PC: AI)

Pakistan Sugar Industry: भारत में चीनी की कीमतें बढ़ीं, तो पाकिस्तान की चीनी मिलों को इसमें अपने लिए एक मौका नजर आने लगा है। भारत सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन रॉ चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री ने अपने अतिरिक्त स्टॉक को भारत में बेचने की संभावना तलाशने की मांग उठा दी। मामला इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच सामान्य व्यापार लगभग ठप है। अटारी-वाघा सीमा बंद है और हवाई रास्तों पर भी पाबंदियां हैं। ऐसे में पाकिस्तान की चीनी मिलों का भारत की ओर देखना अपने आप में बड़ी बात है। भारत में चीनी के खुदरा दाम बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं।

पाकिस्तान के पास 12 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त चीनी

पाकिस्तान के अखबार द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ सदस्य चौधरी मुहम्मद वहीद ने सरकार से भारत को अतिरिक्त चीनी निर्यात करने की संभावना तलाशने की अपील की है। वहीद के अनुसार, पाकिस्तान की चीनी मिलों के पास 12 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा अतिरिक्त स्टॉक पड़ा हुआ है। अब अगला गन्ना पेराई सीजन भी नजदीक है। अगर पुराना माल नहीं बिका तो नई फसल आने पर स्टॉक का पहाड़ और बड़ा हो सकता है। मिलों के सामने सिर्फ माल बेचने की चिंता नहीं है। उन्हें किसानों से अगली फसल का गन्ना खरीदने के लिए भी पैसे की जरूरत होगी। ऐसे में मौजूदा स्टॉक जल्दी बिकना उनके लिए बेहद जरूरी है।

भारत क्यों दिख रहा है बेहतर बाजार?

पाकिस्तानी चीनी मिलों का मानना है कि भारत भौगोलिक रूप से काफी करीब है। अगर दोनों देशों के बीच व्यापार की अनुमति मिलती है तो दूर के देशों की तुलना में परिवहन लागत कम पड़ सकती है। वहीद का कहना है कि भारत को चीनी बेचने से पाकिस्तान की मिलों को विदेशी मुद्रा मिल सकती है, नकदी की स्थिति सुधर सकती है और स्टोरेज पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। साथ ही मिलें किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर कर पाएंगी। यानी एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश होगी।

अभी भारत क्यों नहीं आ सकती पाकिस्तानी चीनी?

दिक्कत यह है कि दोनों देशों के बीच इस समय ऐसा कोई सामान्य व्यापार इंतजाम नहीं है, जिसके तहत पाकिस्तानी चीनी सीधे भारत पहुंच जाए। फिलहाल पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री सिर्फ अपनी सरकार से इस विकल्प पर विचार करने की मांग कर रही है। अगर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता है, तो दोनों देशों की सरकारों से मंजूरी और व्यापार के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत होगी।

भारत ने क्यों खोला चीनी आयात का रास्ता?

भारत सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने इसके लिए टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत आयात की व्यवस्था की है। भारत आम तौर पर चीनी के आयात पर काफी ऊंची ड्यूटी लगाता है। ऐसे में ड्यूटी फ्री आयात की यह अनुमति बाजार के लिए बड़ा बदलाव है।

चीनी के दाम में क्यों आई तेजी?

घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज उछाल आया है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक 18 अगस्त को देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत करीब 4,000 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल रही। एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने स्टॉक रखने की सीमा से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं। सरकार का कहना है कि बाजार में उपलब्ध चीनी घरेलू खपत के लिए पर्याप्त है। उसके मुताबिक कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे जमाखोरी, सट्टेबाजी और जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने जैसी गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। यानी सरकार की नजर सिर्फ सप्लाई पर नहीं, बल्कि बाजार में चीनी के कारोबार के तरीके पर भी है।

पाकिस्तान की मिलों पर भी बढ़ रहा दबाव

दूसरी तरफ पाकिस्तान की चीनी इंडस्ट्री खुद मुश्किल दौर से गुजर रही है। मिलों के पास बिना बिका स्टॉक जमा है और इनपुट लागत बढ़ रही है। वहीं, अगले पेराई सीजन की तैयारी का खर्च भी आ रहा है। अगले सीजन में पाकिस्तान में करीब 80 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में पुराना स्टॉक बचा रहा तो नई फसल आने के बाद मिलों पर दबाव और बढ़ सकता है।