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हरियाणा: निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव जीते

हरियाणा से निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव जीत गए हैं। डॉ. चंद्रा को भाजपा ने समर्थन दिया था
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Yuvraj Singh Jadon

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Updated: 11 Jun 2016, 7:55 PM IST

dispute over subhash chandra nomination

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नई दिल्ली। हरियाणा से निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव जीत गए हैं। डॉ. चंद्रा को भाजपा ने समर्थन दिया था। कांटे के मुकाबले में मीडिया मुगल डॉ. चंद्रा ने इनेलो समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद को पटखनी दी।

हालांकि आरके आनंद को इनेलो समर्थित उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था जिसे कांग्रेस ने अपना समर्थन देने की बात कही थी। लेकिन कांग्रेस के विधायकों के 14 वोट रद्द होने से डॉ. चंद्रा की जीत की राह आसान हो गई।

हरियाणा से राज्यसभा की दूसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार एवं केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह विजयी हुए हैं।


मुंबई में होकर भी हरियाणा से जुड़े रहे हैं सुभाष चंद्रा
चंडीगढ़। कई तरह के राजनैतिक उठापटक के बाद राज्यसभा में पहुंचने वाले भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा का समूचा कारोबार भले ही मुंबई अथवा विदेशों में रहा हो लेकिन वह हरियाणा के साथ हमेशा ही जुड़े रहे हैं। सुभाष चंद्रा मूल रूप से हरियाणा के हिसार के रहने वाले हैं। हरियाणवी मूल का होने के नाते सुभाष चंद्रा गाहे-बगाहे यहां कई तरह के सामाजिक कार्यों में भाग लेते रहे हैं।

हिसार में जन्में सुभाष चंद्रा
30 नवंबर 1950 को हिसार में जन्में सुभाष चंद्रा ने प्रारंभिक शिक्षा हिसार में ही हासिल की। परिवारिक हालातों के चलते चंद्रा ने दसवीं के बाद ही पढ़ाई बीच में छोड़ दी और अपने पिता के कारोबार में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। इसके बाद वर्ष 1980 में सुभाष चंद्रा ने अपने परिवार के सदस्यों की मदद से प्लास्टिक का कारोबार शुरू किया।

मीडिया जगत में कदम रखा
इसके कारोबार के बाद सुभाष चंद्रा ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा और वर्ष 1992 में टीवी. चैनल के माध्यम से मीडिया जगत में कदम रखा। चंद्रा ने कई देशी-विदेशी टीवी चैनल शुरू किए और इलैक्ट्रोनिक मीडिया की दुनिया को नया मोड़ दिया। सुभाष चंद्रा द्वारा संचालित टीवी चैनलों की आज हर घर में अपनी अलग जगह है।

समाज सेवा से जुड़े
इस बीच वह हरियाणा की माटी से लगातार बंधे रहे और हिसार समेत प्रदेश के कई जिलों में समाज सेवा से जुड़े कार्यों को बढ़ावा दिया। जरूरतमंद लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था करना, अंतिम छोर पर बसे बच्चों को शिक्षा प्रदान करके समाज की मुख्य धारा से जोडऩा सुभाष चंद्रा संचालित संगठनों का मुख्य कार्य है।

विवादों में भी घिरे
इस बीच पिछले कुछ वर्षों से सुभाष चंद्रा कई तरह के विवादों में भी घिरे रहे हैं। वर्ष 2013 में अरविंद केजरीवाल तथा अन्ना हजारे विवाद और इसके बाद वर्ष 2015 में कांग्रेस की सरकार के समय धोखाधड़ी के कई मामलों में सुभाष चंद्रा का नाम आने से वह कई विवादों में भी फंसे रहे। कांग्रेस के पूर्व सांसद नवीन जिंदल के साथ कोयला घोटाले का विवाद देश-विदेश में छाया रहा था। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद सुभाष चंद्रा को कुछ राहत मिली और उन्होंने अपने टीवी चैनलों के माध्यम से केंद्र सरकार के कई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। अब सुभाष चंद्रा हरियाणा से राज्यसभा में जाकर यहां के लोगों के अधिकारों की आवाज उठाएंगे।