
covid-19
चेन्नई. शहर में प्रत्यारोपण विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड -19 द्वारा लाई गई दीर्घकालिक स्वास्थ्य जटिलताओं का खुलासा करते हुए हाल के दिनों में दोहरे फेंफड़े के प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण करने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि हुई है। हालांकि वे संक्रमण से उबरने वालों का केवल एक छोटा सा हिस्सा हैं। प्रत्येक रोगी के लिए फेफड़े प्राप्त करना, सामान्य समय के दौरान भी एक मुश्किल काम है। ऐसे में विभिन्न चुनौतियों के कारण और भी मुश्किल हो गया है।
वैसे अधिकांश रोगी कोविड निमोनिया से ठीक हो जाते हैं। कई उसके बाद द्वितीयक संक्रमण विकसित करते हैं। उनमें से कुछ फेफड़े धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और ऑक्सीजन पर बने रहते हैं। यदि वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद भी उनके रक्त में ऑक्सीजन संतृप्ति गिरती है, तो उन्हें एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) पर रखा जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि जिन लोगों को गंभीर और अपरिवर्तनीय क्षति होती है, उन्हें डबल लंग ट्रांसप्लांट के लिए माना जाता है।
एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन समर्थन 4-6 सप्ताह के लिए दिया जाता है, और यदि वह काम नहीं करता है तो डबल लंग ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है। प्रत्यारोपण के बाद भी इन रोगियों को बहुत सारी दवाओं पर रहना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार उनके पास पांच साल तक जीवित रहने की दर लगभग 50 प्रतिशत है। जिन लोगों को कोविड के कारण अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें डबल लंग ट्रांसप्लांट के लिए नहीं माना जाता है। प्रत्यारोपण के लिए एक स्वस्थ फेफड़ा प्राप्त करना एक और संघर्ष है जिसका डॉक्टरों को सामना करना पड़ता है।
ड्यूल लंग ट्रांसप्लांट चुनौतीपूर्ण
ड्यूल लंग ट्रांसप्लांट चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण के बाद भी अस्पताल को एक महीने या उससे भी अधिक समय के बाद अंग प्राप्त होता है। तब तक मरीज की हालत और खराब हो गई होगी। चिकित्सकों का कहना है कि हमें दूसरे शहरों से ड्यूल लंग डोनेशन मिलता था। लेकिन लॉकडाउन के बाद यह मुश्किल हो गया है। ब्रेन डेड के केवल 20-30 प्रतिशत मामलों में प्रत्यारोपण के लिए स्वस्थ दोहरे फेफड़े होते हैं, उपलब्धता एक प्रमुख चिंता का विषय है।
पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन कोई विकल्प नहीं
डॉक्टरों ने कहा कि जब पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन कोई विकल्प नहीं है, तो उच्च तीव्रता के साथ कोविड के बाद के मामलों में वृद्धि हुई है और फाइब्रोसिस के अधिक मामले सामने आए हैं। प्रतिरक्षादमनकारी दवाओं पर पुरानी मधुमेह से पीड़ित बुजुर्ग व्यक्ति और अन्य कॉमरेडिडिटी वाले लोग फेफड़े के फाइब्रोसिस विकसित कर सकते हैं। उनके लिए ईसीएमओ समर्थन एक पुल के रूप में दिया जाता है यदि वे फेफड़े के प्रत्यारोपण से लाभान्वित हो सकते हैं। दोहरे फेफड़े के प्रत्यारोपण के लिए उम्मीदवारों का चयन भी बहुत मुश्किल है, क्योंकि माध्यमिक संक्रमण हो सकता है और उनके शरीर प्रत्यारोपण प्रक्रिया के बाद इसे अस्वीकार कर सकते हैं।
Updated on:
24 Jul 2021 01:09 am
Published on:
24 Jul 2021 01:09 am
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