
स्कूल की दीवार से लगा स्लाटर हाउस
जिला मुख्यालय के नया मोहल्ला का एक दृश्य लंबे समय से शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यहां स्थित प्राथमिक स्कूल और बूचडख़़ाना अगल बगल में संचालित हो रहे हैं। यह दुर्लभ लेकिन चिंताजनक स्थिति बच्चों की शिक्षा और मानसिक विकास पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
नया मोहल्ला में संचालित शासकीय प्राथमिक स्कूल में लगभग 63 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं उनके बगल में खुले बूचडख़़ाने में बकरों की हत्या होती है। सुबह-सुबह बच्चों के स्कूल पहुंचते ही उनके सामने हिंसा का दृश्य शुरू हो जाता है और उसके तुरंत बाद मांस का विक्रय शुरू हो जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि खुले बूचडख़़ाने के आसपास गंदगी और बदबू का आलम रहता है। कचरे और अपशिष्टों के ढेर के कारण आसपास का इलाका अस्वच्छ हो गया है। यह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि आसपास की बस्तियों में रहने वाले नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
शिक्षकों और प्रशासन के प्रयासों के बावजूद यह स्थिति बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर असर डाल रही है। कई अभिभावक और स्थानीय जागरूक लोग बताते हैं कि बच्चों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इस माहौल में बच्चों की नियमित उपस्थिति भी कम रहती है, जिससे पढ़ाई मात्र खानापूर्ति का रूप ले लेती है।
प्राथमिक शाला के बच्चे स्कूल के बाहर लगे हैंडपंप से पानी का उपयोग कर रहे हैं। यही हैंडपंप का उपयोग स्लाटरहाउस के लोग भी कर रहे हैं। हैंडपंप के पास गंदगी का ढेर लगा रहता है। गौरतलब है कि आबादी के बीच स्लाटर हाउस के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। लेकिन छतरपुर में स्लाटर हाउस आज भी 40 साल पुराने स्थल पर ही संचालित किया जा रहा है, जो आज चारों ओर से आबादी से घिरा हुआ है।
तात्कालिक अपर कलेक्टर नम: शिवाय अरजरिया ने दो साल पहले नया मोहल्ला स्थित स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किया। इस दौरान तात्कालिक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह एवं नगरपालिका सीएमओ माधुरी शर्मा भी उपस्थित रहीं। एडीएम ने खुले में मांस की दुकाने लगाने वालों को समझाइस देते हुए निर्देशित किया कि खुले में मांस से संबंधित सामग्री का विक्रय न करें। उन्होंने कहा स्लॉटर हाउस में आवंटित दुकानों में ही विक्रय करें। एडीएम ने नगरपालिका को स्वच्छता व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए। एडीएम ने वहां स्थित प्राथमिक शाला का निरीक्षण कर स्कूल का द्वार मेन रोड की तरफ करने का प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इसके बाद कुछ खास नहीं हुआ। सिर्फ स्कूल की बाउंड्रीबॉल बना दी है। जिससे बूचड़खाना और स्कूल का परिसर अलग दिखने लगे। जबकि अब भी दोनों की दीवारें सटी हुई है। बच्चों का स्कूल आने का रास्ता अब भी बुचडख़ाना से गुजरता है।
छह साल पहले लगभग दो करोड़ की लागत से नगर पालिका ने शहर से बाहर नया बूचडख़़ाना तैयार किया था। लेकिन वर्तमान में यह भवन उपयोग में नहीं है। यहां ताले लगे हैं। प्रशासन भी इसे मछली के लिए स्लाटर हाउस बता रहा है। मटन के लिए स्लाटर हाउस न होने का हवाला नगरपालिका दे रही है। लेकिन विभागीय तालमेल के अभाव में स्लाटर हाउस के पास स्कूल का संचालन अब भी जारी है।
इनका कहना है
शिकायत मिली थी। नगरपालिका को चार बार निर्देशित भी किया है। स्लाटर हाउस को शहर से बाहर करने की जल्द कवायद कराई जाएगी।
निखिल राठौर, एसडीएम
स्लाटर हाउस पहले से वहां चल रहा है। स्कूल बाद में आया। मैने राजस्व विभाग को पत्र लिखकर स्लाटर हाउस के लिए जमीन आवंटित करने को लिखा है। भवन नगर पालिका का है, तो स्कूल शिक्षा विभाग को भी स्कूल अन्यत्र संचालित करने के लिए पत्र लिखा है। जल्द ही कोई समाधान निकाला जाएगा।
माधुरी शर्मा, सीएमओ
Updated on:
9 Sep 2025, 10:43 AM IST
Published on:
9 Sep 2025, 10:43 AM IST
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