वहीं मौत की संख्या को छिपाने के उद्देश्य से अधिकारियों के दबाव में आकर निगम कर्मचारियों ने सूचना देना बंद कर दिया। इस वजह से शेष आंकड़ों में पॉजिटिव और संदिग्ध बता पाना मुश्किल हैं। बता दें कि इसके पहले भी आंकड़ों के खेल को लेकर कई बार विसंगतियां सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद जिम्मेदारों ने गलतियों में सुधार भी किया था।