
pandhurna gotmar mela 2026, गोटमार मेले के लिए लाए गए पत्थर (Source-Patrika)
Pandhurna Gotmar Mela 2026: मध्यप्रदेश के पांढुर्ना जिले का विश्वप्रसिद्ध गोटमार मेला शुक्रवार को जाम नदी के तट पर आयोजित होगा। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक पांढुर्ना और सांवरगांव के लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाकर अपनी वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करेंगे। इस पारंपरिक खेल को लेकर बुधवार को ही नदी तट पर बड़ी संख्या में पत्थरों के ढेर जमा हो चुके हैं। हर साल पोला त्योहार के ठीक दूसरे दिन जाम नदी के तट पर यह मेला पूरी भव्यता और जोखिम के साथ खेला जाता है।
नदी के बीचों-बीच पलास का एक पेड़ गाड़ा जाता है, जिसे पांढुर्ना और सांवरगांव के लोग अपने कब्जे में लेने के लिए दिनभर संघर्ष करते हैं। पांढुर्ना पक्ष इस झंडे को तोड़ने का प्रयास करता है, जबकि सांवरगांव पक्ष उन्हें रोकने के लिए पत्थरों की बौछार करता है। इस खतरनाक खेल में हर साल दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं, और अब तक इस मेले के इतिहास में 14 लोगों की जान भी जा चुकी है।
मेले के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पांढुर्ना के साथ-साथ जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और नरसिंहपुर जिले का पुलिस बल तैनात किया गया है। इसमें एसडीओपी, टीआई, एसआई, एएसआई के अलावा बड़ी संख्या में प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए होमगार्ड और अर्धसैनिक बल भी बुधवार शाम से ही पहुंच चुके हैं। गोटमार में घायलों के त्वरित उपचार के लिए मेला स्थल पर 7 अस्थाई चिकित्सा शिविर बनाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक शिविर में 17 स्वास्थ्यकर्मियों का स्टाफ तैनात रहेगा। इसके अलावा, मेला स्थल से घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाने के लिए छोटी-बड़ी एम्बुलेंस की विशेष व्यवस्था की गई है।
प्रेमी युगल की अमर प्रेम कहानी: मान्यताओं के अनुसार, पांढुर्ना के एक युवक को सांवरगांव की युवती से प्रेम था। जब युवक युवती को भगाकर लाने की कोशिश कर रहा था, तब जाम नदी पार करते समय सांवरगांव वालों ने उन्हें रोकने के लिए पत्थर बरसाए। जवाब में पांढुर्ना वालों ने प्रेमी युगल की रक्षा के लिए पत्थर बरसाए। इस हिंसक संघर्ष में पत्थर लगने से उस प्रेमी युगल की मौत हो गई थी, जिनकी याद में आज भी यह मेला खेला जाता है।
राजा भोसले और जाटवा नरेश का युद्ध: मान्यताओं के मुताबिक दूसरी किवदंती के अनुसार, सन् 1740 में देवगढ़ के राजा जाटवा नरेश और नागपुर रियासत के राजा रघुजी भोसले की सेनाओं के बीच सीमा विवाद को लेकर संघर्ष हुआ था। रघुजी भोसले की सेना के पास आधुनिक हथियार थे, जबकि जाटवा नरेश की सेना ने तीर-कमान से मुकाबला किया। तीर खत्म होने पर सैनिकों ने पत्थरों से ही दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था, जिसे गोटमार का ऐतिहासिक आधार माना जाता है।
Updated on:
09 Sept 2026 09:26 pm
Published on:
09 Sept 2026 09:23 pm
