
चित्रकूट. पेयजल संकट सहित अन्य मूलभूत मुद्दों को लेकर पिछले 16 दिनों से अनशनरत ग्रामीणों का अभी तक निर्दयी प्रशासन ने कोई ख्याल नहीं किया है, जिससे क्षुब्ध होकर अब ग्रामीणों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। न जाने कौन सी मजबूरी है मखमली कुर्सियों पर बैठे लम्बरदारों की जो तपती हुई तपन में खुले आसमां के नीचे बैठे ग्रामीणों की सुध तक नहीं ले सकते। उधर अनशन पर बैठी एक महिला की तबियत खराब होने पर उसे ग्रामीणों ने अस्पताल में भर्ती कराया है। ग्रामीणों का भी अब आर पार का एलान है कि जब तक मांगों को नहीं माना जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा चाहे कुछ भी हो जाए।
पिछले 16 दिनों से पेयजल संकट सहित कई मूलभूत समस्याओं की सुनवाई उनके समाधान की आस में अनशन पर बैठे पहाड़ी ब्लाक के ग्रामीणों की अभी तक प्रशासन ने सुध लेने की आवश्यकता नहीं समझी है। परिणामतः हिम्मत न हारते हुए ग्रामीण भी आर पार की लड़ाई का मन बना बनाते हुए आमरण अनशन शुरू कर चुके हैं।
पिछले 15 दिनों से चल रहा आंदोलन
ग्राम पंचायत पहाड़ी सहित बकटा बुजुर्ग पथरा मानी बाबूपर आदि गांवों में भीषण पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण पिछले 15 दिनों से पहाड़ी ब्लाक में क्रमिक अनशन पर बैठे थे। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने से आक्रोशित क्षुब्ध ग्रामीणों ने अब आमरण अनशन शुरू कर दिया है। इस दौरान एक महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों पिछले पन्द्रह दिनों से आन्दोलनरत हैं, लेकिन अधिकारी तो अधिकारी कोई जनप्रतिनिधि भी उनके पास नहीं पहुंचा सुध लेने को।
पेयजल संकट को लेकर आंदोलन
ग्रामीणों का ये आंदोलन पेयजल संकट को लेकर है. दलित बस्ती में पाइप लाइन बिछाने सहित हैण्डपम्पों की मरम्मत और नए हैण्डपम्प लगाने पानी के टैंकरों से जलापूर्ति करने की मांग को लेकर विभिन्न गांवों के ग्रामीण आंदोलन में शामिल हैं। ग्रामीणों ने अपने अपने गांवों की पेयजल संकट सम्बंधित स्थिति बताते हुए कहा कि इस भीषण तपन और गर्मी में उनके इलाके में लोग बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं और अधिकारी चैन की बंसी बजा रहे हैं। बकटा बुजुर्ग के ग्रामीणों के मुताबिक उनके गांव में अधिकांश हैण्डपम्प खराब हैं और जो सही भी हैं उनमें से भी थोडा पानी निकलने बाद वे जवाब दे जाते हैं। ग्रामीण दूर दूर से दूसरी ग्राम पंचायतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
आर पार की लड़ाई का एेलान
आन्दोलनरत आमरण अनशन कर रहे किसानों ने अब आर पार की लड़ाई का एलान किया है। अनशन की अगुवाई कर रहे विशाल भाई ने कहा कि कई बार प्रशासन को चेताया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शासन प्रशासन किसानों ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा न ले अन्यथा आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। जब तक मांगों को पूरी तरह से नहीं मान लिया जाता और क्रियान्वयन शुरू नहीं हो जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
उधर इस पूरे मामले में बीडीओ पहाड़ी शेर बहादुर ने कुछ दूसरी ही दलील देते हुए कहा कि ग्रामीणों की मांगे मान ली गई हैं और जल्द ही पेयजल संकट का समाधान किया जाएगा. फिर ग्रामीण आंदोलन पर क्यों है यह पूछने पर बीडीओ के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। दूसरी तरफ आंदोलन की अगुवाई कर रहे विशाल भाई के मुताबिक अभी तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई जिससे क्षुब्ध होकर आमरण अनशन को बाध्य हुए हैं।
Published on:
1 May 2018, 6:06 PM IST
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