7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सावधान! नवरात्र में बढ़ी मांग तो केमिकल से पकाकर बेच रहे फल; कहीं आप भी नहीं कर रहे इस्तेमाल

chittorgarh news: यह केमिकल इतने खतरनाक हैं कि इनसे त्वचा की गंभीर बीमारियां हो सकती है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

चित्तौड़गढ़

•

image

Alfiya Khan

•

Updated: 6 Oct 2024, 2:53 PM IST

FRUITS

चित्तौड़गढ़।सेहतमंद रहने के लिए डाइट में फलों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। लेकिन, वही फल सेहत बनाने की बजाय सेहत बिगाडऩे का कारण बन जाए तो उसे खाने से पहले विचार करना जरूरी हो जाता है। दरअसल, फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए जिन रसायनों का उपयोग हो रहा है।

वह मानव स्वास्थ्य के लिए कतई सुरक्षित नहीं। कैल्शियम कार्बाइड नामक रसायन तो इतना खतरनाक है कि फलों के साथ उसके शरीर में जाने से लीवर और किडनी खराब हो सकते हैं। इसके अलावा कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का जोखिम इस रसायन के शरीर में जाने से बढ़ जाता है।

यह भी पढ़ें: राजस्थान में यहां बनेगा इंडोर स्टेडियम, 4 करोड़ की लागत से बन कर होगा तैयार; जानिए- क्या है खासियत

रसायनों से पकाया हुआ फल सेहत के लिए खतरा

पेड़ पर पका हुआ फल सेहत का खजाना है। वहीं, रसायनों से पकाया हुआ फल सेहत के लिए खतरा। केले को पकाने के लिए सरकार राइजनिंग चैंबर पर अनुदान देती है। यहां भी इन्हें बनाया जा सकता है। फलों को पकाने और उनको कई दिन तक ताजा रखने के लिए डीडीटी, इथरेल और जिब्रलिक का उपयोग किया जाता है।

यह केमिकल इतने खतरनाक हैं कि इनसे त्वचा की गंभीर बीमारियां हो सकती है। टाइप-2 डायबिटीज, पीसीओडी का खतरा भी बढ़ सकता है। सेब को मंडी में लाकर कई महीनों तक कोल्ड स्टोर में रखा जाता है। इससे पहले इसका वैक्सीनेशन होता है। ताकि, ये ज्यादा समय तक खराब नहीं हो। ऐसे ही अंगूर को टिकाने के लिए डाइक्लोवास 26 ईसी नाम के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अंगूर को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल हो रहा यह केमिकल सेहत के लिए खतरनाक है।

जिस फल को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग किया जाता है उस पर दाग धब्बे पड़ जाते हैं। केले और आम पर यह दाग धब्बे स्पष्ट दिखाई देते हैं। छिलके पर छिड़काव किया हुआ यह रसायन बाद में भीतर तक चला जाता है। इस बार बाजार में केले आ रहे हैं, उन पर रसायन का छिड़काव इतना ज्यादा किया हुआ है कि केले पिलपिले होकर सड़ांध मारने लगे हैं। उसका स्वाद इतना खराब हो जाता कि खाने को जी नहीं करता।

किया बैन, फिर भी धड़ल्ले से प्रयोग

केला और पपीता अब साल भर चलने वाले फलों में शामिल हो गए हैं। फलों का राजा आम गर्मी के मौसम में मिलता है। इन तीनों फल को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड नामक रसायन उपयोग में लिया जाता है। इस रसायन को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथारिटी ऑफ इंडिया ने बैन किया हुआ है और फलों को पकाने में इसका उपयोग नहीं करने की चेतावनी भी दे रखी है। इसके बावजूद इस रसायन का उपयोग फल उत्पादक और विक्रेता खुलेआम कर रहे हैं।

फल के साथ सावधानी जरूरी

सेहत के लिए फल जरूरी है। खरीदने और खाने से पहले सावधानी बरती जाए तो रसायनों से पके फल खाने से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। बाजार से जब भी फल खरीदें उन पर दाग धब्बे नहीं होने चाहिए। खाने से पहले फलों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। अगर किसी फल पर वैक्सीनेशन किया हुआ है तो उसका छिलका उतार कर ही खाना चाहिए। फल हमेेशा भरोसेमंद दुकानदार से ही खरीदने चाहिए। -डॉ. शंकरलाल जाट, उप निदेशक उद्यान,चित्तौड़गढ़

यह भी पढ़ें: एक सरपंच तो दूसरी इंजीनियर जो आदिवासी समाज के लिए बनी रॉल मॉडल, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित