
कड़ाके की सर्दी के मामले में चित्तौडग़ढ़ भी पीछे नहीं है। बरसों से लोग यहां पर सर्दियों में राहत के लिए रूई से बनी देसी तकनीक वाली रजाई-गद्दे काम में लेते रहे हैं। जिसके चलते यह रोजगार किसी समय यहां पर खूब फला-फूला। रूई पिनाई के काम से जुड़े लोगों के कई परिवार ग्रामीण इलाकों से यहां पर आकर बस गए।
समय बदला तो रजाई-गद्दे बनाने की तकनीक भी बदली। हाथ की जगह मशीनों ने ले ली। एक जमाना था जब सर्दी के मौसम की शुरुआत होते ही पिनाई का काम करने वालों के यहां पर लोगों की भीड़ जुटने लगती थी। लेकिन, बीते एक दशक से हाथों से भरे जाने वाले रजाई-गद्दों के स्थान पर लोगों ने रेडिमेड गर्म कम्बल व गद्दे लेना शुरू कर दिए। जिससे बड़ी संख्या में पिनाई के काम से जुड़े परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है। महंगाई के कारण लोग सस्ते विकल्प के तौर पर सिंथेटिक कंबल खरीद रहे हैं।
रजाइ-गद्दे के कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि करीब एक दशक पहले दीपावली के बाद गुलाबी सर्दी की दस्तक के बाद शहर के लोग रजाइ-गद्दे भरवाना शुरू कर दे ते थे। सीजन में फुरसत ही नहीं मिलती थी। दिन-रात रूई के रजाई-गद्दे भरने व सिलने का काम चलता था। जिले में इस व्य़वसाय से जुड़े करीब 150 परिवारों सहित सिलाई व भराई का काम करने वाले 200 मजूदरों के परिवारों की रोटी का बारह महीने का जुगाड़ हो जाता था।
रजाई महंगी, कंबल सस्ते
सेंती निवासी मुस्ताक अहमद ने बताया कि रजाई-गद्दे भराई व पिनाई का काम उनकी कई पीढिय़ों से किया जा रहा है। इस कारोबार से शहर में कई परिवार परंपरागत रूप से जुड़े हैं। वर्तमान में एक अच्छी रजाई की कीमत करीब एक हजार से बारह सौ पड़ रही है। रजाई में धागा डालने व रूई पीन कर भरने वाले मजूदरों का परिवार भी इसी कारोबार से चलता है। अब कंबल सस्ती दर पर मिल रहे हैं तो लोगों का रूई की देशी तकनीक वाली रजाइयों से मोह भंग हो रहा है।
घटकर आधी हो गई बिक्री
रजाई-गद्दों के व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में बिक्री घट कर आधी से भी कम रह गई है। पहले जहां एक दुकान पर सीजन में महीने की सौ रजाई व गद्दे बिकते थे। बीते एक दशक में यह बिक्री घट कर आधी रह गई है। हालात यह हैं कि सीजन के समय कमाई होने की आस में स्टॉक करने के लिए लगाई गई पूंजी पर ब्याज देना पड़ रहा है। बिक्री हो नहीं रही। दिनभर में मुश्किल से एक दो रजाई कभी कभार बिक रही है। इस व्यवसाय में मजदूरी करने वाले लोगों पर भी रोजी रोटी का संकट गहरा गया है।
Published on:
25 Dec 2023, 2:51 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.