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पुणे में पूर्व सैन्य अधिकारी की हत्या, सड़क पर जिंदगी गुजारने को था मजबूर

पुलिस ने बताया कि दो अज्ञात लोगों ने पूर्व सैन्य अधिकारी पर हमला कर दिया था और पीट पीटकर उनकी हत्या कर दी थी।
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Kapil Tiwari

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Updated: 4 Feb 2018, 4:31 PM IST

Pune police

Pune police

मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे में पुलिस को भारतीय सेना के एक पूर्व कैप्टन का शव मिला। पुलिस पुणे के कैंट इलाके से संदिग्ध हालत में मिले इस शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच कर रही है। पुलिस को उस इलाके में संतरी की ड्यूटी करने वाले एक शख्स ने इस घटना की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक उसने बाली के साथ कुछ लोगों को मारपीट करते देखा था।

2 अज्ञात लोगों ने किया सैन्य अधिकारी पर हमला
शुरूआती जांच के बाद पुलिस ने बताया कि दो अज्ञात लोगों ने पूर्व सैन्य अधिकारी पर हमला कर दिया था और पीट पीटकर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या के बाद हमलावरों ने शव को कैन्ट इलाके में ही छोड़ दिया था। मृत अधिकारी की पहचान 67 वर्षीय रवींद्र बाली के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वे पुणे कैंट के इलाके में पिछले कई दिनों से अपना जीवन यापन कर रहे थे।

चोरी के इरादे से की गई है हत्या!
छानबीन में पुलिस अधिकारियों को यह भी ज्ञात हुआ कि वहां का एक डॉक्टर बाली को हर महीने जीवन यापन के लिए 2 हजार रुपये दिया करते थे। पुलिस फिलहाल उस डॉक्टर के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने में जुटी है। पुलिस यह जानना चाहती है की क्या उक्त डॉक्टर ने हाल ही में बाली को पैसे दिए थे। दरअसल पुलिस को यह वारदात चोरी के इरादे से की गयी लग रही है।

पुलिस हत्या के हर पहलू की कर रही है जांच
पुलिस इस मामले में रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि बाली की मौत सिर में गंभीर रूप से चोट लगने के कारण हुई है। पुलिस को शक है कि सर पर ईंट से वार कर उनकी हत्या कि गई है। जांच में रवींद्र बाली के पास मिले सामानों से यह पता चला कि बाली सेना के एक पूर्व अधिकारी हैं जो कि नैशनल डिफेंस अकादमी के छात्र रह चुके हैं। जांच में बाली के कुछ रिश्तेदारों का भी पता चला है। लेकिन मौत की खबर फैलने के बाद भी बाली के रिश्तेदारों में से किसी ने भी उनके शव को लेने के लिए दावा नहीं किया है।

1970 में भारतीय सेना में हुए थे शामिल
फिलहाल बाली की अंतिम पोस्टिंग के बारे में जानकारी हासिल करके पुलिस ने सेना की दक्षिणी कमान को पत्र लिखा। उन्होंने सेना से इस संबंध में जानकारी मांगी है। वहीं दूसरी ओर एनडीए ने उनके अकादमी पूर्व छात्र होने की बात की पुष्टि की है। एनडीए में बाली के साथ रहे एक पूर्व सेना अधिकारी ने बताया उन्होंने साल 1970 के जून महीने में भारतीय सेना की नौकरी शुरू की थी।

मानसिक रूप से भी थे परेशान!
बाली के इस साथी ने यह भी दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि रवींद्र बाली अपनी पत्नी और बेटी के कारण मानसिक रूप से परेशान हैं और काफी दिनों से बदहाल स्थिति में रह रहे हैं। इसलिए ही कुछ साल पहले एनडीए के पूर्व छात्र संगठन ने बाली को कुछ मदद देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया। यही नहीं कुछ सैन्य अधिकारी उन्हें अपने घर भी ले जाना चाहते थे लेकिन बाली इसके लिए भी तैयार नहीं हुए।