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SC में केन्द्र का हलफनामा, PAK और ISI से जुड़े हैं रोहिंग्या के तार

म्यांमार से खदेड़े गए रोहिंग्या शरणार्थी पेशवेर तस्करों की मदद से समुंद्र के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकते हैं।
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नई दिल्ली

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Mohit sharma

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Updated: 18 Sep 2017, 2:05 PM IST

 Rohingyas

नई दिल्ली। रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर केन्द्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है। 16 पन्नों के इस हलफनामें में रोहिंग्या समुदाय के लोगों को लोगों को देश के लिए खतरा बताया है। हलफनामें में कहा गया है कि रोहिंग्या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। बताया गया कि रोहिंग्या के पाक आतंकी संगठनों से संपर्क हैं। कोर्ट को रोहिंग्या के हवाला से भी कनेक्शन बताए गए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि कुछ रोहिंग्या आईएसआईएस से भी जुड़े हैं। कुछ रोहिंग्या मुस्ल्मिों के पास अवैध पहचान पत्र पाए गए हैं।

देश में नहीं रख सकते रोहिंग्या

गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि कुछ रोहिंग्या आईएसआईएस से भी जुड़े हैं। कुछ रोहिंग्या मुस्ल्मिों के पास अवैध पहचान पत्र पाए गए हैं। केन्द्र ने कहा है कि रोहिंग्या को देश में नहीं रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में दो अक्टूबर को सुनवाई करेगा। भारत रोहिंग्या लोगों को शरण देने के लिए बाध्य नहीं है। इस तरह से भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ करने वालों की संख्या 40 हजार तक बताई गई है। केन्द्र ने यह भी कहा कि रोहिंग्या से सांप्रदायिक हिंसा भड़कने का भी खतरा है। कुछ रोहिंग्या देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताए गए हैं। बता दें कि देश के राजस्थान, यूपी, आंध्र प्रदेश व मणिपुर आदि राज्यां में रोहिंग्या अवैध रूप से रह रहे हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के कई आतंकी गुट सक्रिया बताए गए हैं।

निकटवर्ती देशों के लिए संकट

रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर जहां बांग्लादेश, थाइलैंड समेत निकटवर्ती देशों के लिए संकट खड़ा हो गया है, वहीं इंटेलीजेंस एजेंसी ने चेतावनी दी है कि म्यांमार से खदेड़े गए रोहिंग्या शरणार्थी पेशवेर तस्करों की मदद से समुंद्र के रास्ते भारत में घुसपैठ कर सकते हैं। बता दें कि म्यांमार के रखाइन में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया जा रहा है, जिसके चलते ये लोग निकटवर्ती देशों में शरण लेने को मजबूर हैं, वहीं भारत सरकार इसका विरोध कर रही है।

भारत में 40 हजार से अधिक रोहिंग्या

जानकारी के मुताबिक म्यांमार में जारी सैन्य संघर्ष के बाद वहां से लगभग 6 लाख रोहिंग्या समुदाय के लोग पलायन कर गए हैं। इनमें से 4 लाख लोग अकेले बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं, जबकि शेष लोग अन्य सीमांत देशों के आसपास जुटे हैं। भारत भी भारी मात्रा में हुए पलायन से प्रभावित हुआ है। 40 हजार रोहिंग्या असम, वेस्ट बंगाल, जम्मू, यूपी और दिल्ली के कैंप में रह रहे हैं। रोहिंग्या बंगाल जैसे क्षेत्रों में घुसपैठ करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। सीनियर इंटेलीजेंस अधिकारियों ने मीडिया को बताया पेशेवर तस्कर ज्यादातर समुद्र के रास्ते म्यांमार से बंग्लादेश आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक संबंधित सभी सुरक्षा एजेंसियां इस तरह के किसी भी प्रयास से बचाव के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि पेशेवर तस्कर अपने पुराने अनुभव के आधार पर रोहिंग्या परिवारों को बड़ी नाव और हाई स्पीड राफ्ट्स की मदद से भगाने का प्रयास कर सकते हैं।

बंगाल जा सकते हैं रोहिंग्या

इंटेलीजेंस सूत्रों के मुताबिक ये तस्कर और रोहिंग्या बंगाल जाना चाहते हैं, बता दें कि बंगाल सरकार ने उनके प्रति सहानुभूति जताई है। यहीं नहीं वेस्ट बंगाल की सीएम ममता बनर्जी न केवल म्यांमार के शरणार्थियों को शरण देने की घोषणा कर चुकी हैं, बल्कि उन्होंने केन्द्र से भी मदद मुहैया कराने की बात कही है। वहीं एजेंसी म्यांमार के साउथर्न पार्ट पर भी नजर बनाए हुए हैं जहां रोहिंग्या अंडमान निकोबार द्वीप में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। बीएसएफ और असम राइफल्स ने भी रोहिंग्या की आबादी को बढऩे से रोकने के लिए म्यांमार बॉर्डर पर गश्त बढ़ा दी है।