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बच्चों का दर्द खुद उनकी जुबानी, अधीक्षक कहते हैं…जिनको खुजली अपने घर जाएं!

50 सीटर आश्रम में 4 माह से खुजली से जूझ रहे बच्चे, जिनको खुजली है वे अपने घर जाएं, बच्चों के नाजुक अंग भी गलने लगे, रोते बच्चों को मिलती है फटकार।
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दंतेवाड़ा

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ajay shrivastav

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Updated: 13 Dec 2017, 4:02 PM IST

अधीक्षक कहते हैं...जिनको खुजली अपने घर जाएं?

अधीक्षक कहते हैं...जिनको खुजली अपने घर जाएं?

आश्रम की सच्चाई, बच्चे 4 माह से हैं इस बीमारी के शिकार, अब तो नाजुक अंग भी लगा है गलने

दंतेवाड़ा. गीदम ब्लॉक के कौरगांव बालक आश्रम में बच्चों की स्थिति बेहद दयनीय है। 50 सीटर आश्रम में सोमवार को 12 बच्चे मौजूद थे। यह आश्रम जिला मुख्यालय से करीब 45 किलामीटर दूर है। छिंदनार घाट तक बाइक से पहुंच सकते हैं। इसके बाद नदीपार कर इस आश्रम में पहुंचा जा सकाता है। इस आश्रम में बच्चे खुजली से 4 माह से परेशान है। रात में दर्द से चीखते है। सो नहीं पा रहे। हांथ गल चुके है। इतना ही नहीं नाजुक अंग भी सडऩे लगे है। इन सभी बातों के जानने के बाद भी आधीक्षक इनको अस्पताल लेकर नहीं गया। यदि कोई बच्चा रोया तो उसे धमकाया जाता है। बच्चों की बात माने तो अधीक्षक आश्रम में रुकता ही नहीं है। जब भी आते है तो बच्चे अपनी समस्या को उनके सामने बयां करते है। इस पर फटकार मिलती है।

जिनको तकलीफ है वह घर चले जाएं
अधीक्षक कहता है जिनको तकलीफ है वे अपने घर जाएं। ये बातें कोई और नही खुद बच्चों ने बयां की है। कौरगांव प्राथमिकशाला में पढ़ा रहे शिक्षक कृपा सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चों को सितम्बर माह से खुजली की समस्या है। अधीक्षक आया था तो कुछ बच्चों को लेकर छिंदनार उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर गया थ। मेडिकल टीम करीब छह माह पहले यहां आई थी। इस पूरे मामले की जानकारी के लिए सहायक आदिवासी आयुक्त आनंद जी सिंक को फोन लगाया, लेकिन उनका फोन नहीं लगा। इस वजह से उनका पक्ष नहीं आ सका है।

चीथड़ों पर भविष्य गढ़ा जा रहा है
बीमार तो बच्चे है। आश्रम में सोने के लिए पर्याप्त बिस्तर नहीं है। समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। अधिकारियों की नजर में जिले की शिक्षा व्यवस्था बेहतर है। आश्रम का हल देखा तो लगा कि इस आश्रम में अधिकारियों ने कभी झांक कर भी नहीं देखा है, अधिकारी एक बार भी समय रहते आते तो बच्चे मुसीबत में नहीं जूझ रहे होते। बच्चों की रात ठिठुर कर कटती है। कंबल भी नहीं है, गद्दे फट चुके है। बच्चे खुद बोले कम्बल चाहिये और जैकेट सर्दी बहुत लगती है। इन शब्दों में दर्द था, एक आह भरी कराह भी। चिथड़ों पर देश के भविष्य को गढ़ा जा रहा है। इन मासूमो के दर्द को टटोलने कोई अधिकारी नहीं आया और न ही प्रशासन ने कभी जानकारी ली है। हालात बद बदत्तर है। बच्चे किसी तरह रह कर तालीम ले रहे है। इन बच्चों में से कई के पास तो ड्रेस तक नहीं हैं।

10 हजार 500 हेल्थ कार्ड का दावा भी झूठा
जिले के सभी आश्रमो और पोटाकेबिन के बच्चों का स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने का दावा किया जा रहा है। जमीनी स्तर पर ये दावा झूठा है। यहां आश्रम में कोई हेल्थ कार्ड नहीं है। कम्प्यूटर में अपलोड करने की बात सीएम एचओ एचएल ठाकुर करते आ रहे है। ये दावा तो यहां खोखला दिखा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बोलने से कतरा रहे है। सच ये है कि इस आश्रम में चिरायु की टीम कभी नहीं आई। इस आश्रम में मेडिकल कैम्प भी नहीं लगा।