सर्चिंग पर निकलने से पहले हो रही थी हथियारों की सफाई, हो गया ये हादसा, 3 जवान घायल, रायपुर रेफर

Badal Dewangan

Publish: Mar, 14 2018 12:32:36 PM (IST)

Aranpur, Dantewada, Chhattisgarh, India
सर्चिंग पर निकलने से पहले हो रही थी हथियारों की सफाई, हो गया ये हादसा, 3 जवान घायल, रायपुर रेफर

अरनपुर कैंप में 111 बटालियन के जवान राम सिंह, एस शरापन और एम गणेश शेखरन घायल हुए हैं। 20 जवानों की टोली सर्चिंग पर निकलने की तैयारी कर रही थी।

दंतेवाड़ा. अरनपुर कैंप में बुधवार की सुबह सफाई करने के दौरान युबीजीएल चल गई। इस लांचर की चपेट में आने से तीन जवान घायल हो गए। कैंप में धमाके की आवाज सुन सभी जवानों ने मोर्चा संभाल लिया। अफरा.तफरी का माहौल बन गया। पता चला कि एक जवान से सफाई के दौरान यह आधनिक हथियार चला है। उसकी चपेट में आ कर जवान घायल हुए हैं। आनन.फानन में तीनों जवानों को जिला अस्प्ताल लाया गया है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर के लिए रेफर कर दिया गया है।

अरनपुर कैंप में 111 डी बटालियन के जवान राम सिंह, एस शरापन और एम गणेश शेखरन घायल हुए हैं। कैंप से जुड़े सूत्रों की बात मानें तो 20 जवानों की टोली सर्चिंग पर निकलने की तैयारी कर रही थी। जवानों को सर्चिंग पर निकलने से पहले अपने हथियारों को चेक करना होता है। सुबह करीब सवा आठ बजे एक जवान अपने यूबीजीएल को साफ कर रहा था। इसी दौरान यह आधुनिक हथियार चल गया। हैंड ग्रनेट लांचर की चपेट में एस शरापन सबसे पहले आया। उसके सीने सहित शरीर के अन्य अंग जख्मी हो गए। वहीं राम सिंह और एम गणेश शेखरन भी पास में मौजूद होने से चपेट में आ गए। ये दोनों भी घायल हुए। हालांकि दोनों जवानों को खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

डॉक्टर ने कहा बेहद गंभीर है शरापन
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. दीपक कश्यप बताते है घायल तीनों जवान फिलहाल खतरे से बाहर है। एस शरापन गंभीर रूप से घायल है। उसके सीने की मांस पेशियां फट गई थी। बेहद गंभीर मामला था। उसको बचाने के लिए आईसीडी का इस्तेमाल किया गया है। यह बैटरी संचालित डिवाइस है जो हमारे हृदय विशेषज्ञ छाती या पेट में त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित करते हैं। आईसीडी का उपयोग हृदय को धडक़ाने के लिए करते हैं। इस डिवाइस के इस्तेमाल से शरापन रायुपर आसानी से पहुंच सकता है।

ये है यूबीजीएलए ऐसे करता है काम
40 मिमी यूबीजीएल भारतीय आईएनएसएस और एके47 राइफल्स से जुड़ा जा सकता है और कठोरता के लिए 3.बिंदु वाला लगाव है। यूबीजीएल में आकस्मिक फायरिंग को रोकने के लिए एक अंतर्निहित सुरक्षा है। ट्रिगर सिस्टम बैरल के किनारे स्थित है। जिससे सैनिक अपने फायरिंग रिक्ति को बदलने के बिना दोनों राइफल और ग्रेनेड लांचर को आग लगा सकते हैं। इसकी अधिकतम सीमा 400 मीटर है। इसमें रात फायरिंग के लिए ट्रिटियम रोशनी वाली जगहें भी हैं। यूबीजीएल द्वारा गोला बारूद भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए गए मिल्कोर एमजीएल के समान है।

एएसपी गोरखनाथ बघेल ने बताया कि, सफाई करने के दौरान युबीजीएल चली है। इसकी चपेट में तीन जवान आए है। तीनों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पाल से रायपुर रेफर किया गया है।

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