सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे विकास अधिकारी डॉ.हरकेश मीणा ने कार्य को बंद करवा दिया। इस दौरान अस्पताल में लोगों की भीड़ जमा हो गई। ग्राम विकास अधिकारी संगीता बाजिया ने बताया कि कुछ महिलाओं को तो तुरन्त मौके पर ही दवा दे दी थी। बाद में अस्पताल लेकर आए। विकास अधिकारी ने बताया कि खानपुरा में १२० मनरेगा श्रमिकों की मस्टररोल थी। जिसमें ४५ श्रमिक एक तलाई में मिट्टी खुदाई का काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों के हमले से अनोखी, मीरा, उर्मिला, ममता, सुनीता, लल्ली, भोरी देवी, मंजू, सुनीता, सीता, भागोती, मंजू, रूकमणी, मंजू, उगन्ती, सीता समेत बीस श्रमिक घायल हो गए। इसमें कुछ श्रमिकों को तो परिजन मौके से ही निजी अस्पताल ले गए।
मनरेगा कार्य के समय परिवर्तन की मांग
ग्रामीणों व श्रमिकों ने विकास अधिकारी से मनरेगा कार्य का समय परिवर्तन की मांग की। उन्होंने बताया कि पहले सुबह छह से एक बजे का तक समय था, लेकिन अब परिवर्तन कर नौ से पांच बजे का हो गया। इस दौरान तेज धूप रहने से परेशानी होती है।