लोगों का कहना है कि नीलकंठ की पहाड़ी के नीचे दौसा शहर बसा हुआ है, यदि पहाड़ी में घूम रहा पैंथर कभी आबादी वाले शहर में आ गया तो हालात बिगड़ सकते हैं। इधर वन विभाग के दौसा रैंजर बबलू मीना एवं फोरेस्टर रामजीलाल मीना ने बताया कि पहाड़ी में अब कोई पैंथर नहीं है। उन्होंने पैंथर को पकडऩे के लिए पिंजरा भी लगाया था, लेकिन नहीं मिला। रैंजर ने बताया कि उनको अंदेशा है, जो पैंथर पिछले महीनों श्यालावास में एक मकान में जाकर छिपा था, शायद यह वही पैंथर था। फिर भी एहतियात के तौर पर उसको ढूंढने के लिए वनकर्मियों की टीम लगाई जाएगी।