8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दौसा: नीलकंठ पहाड़ी पर घूमता दिखा पैंथर, लोगों में भय

नीचे आ गया तो कर सकता है कइयों को जख्मी
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

दौसा

•

image

Mahesh Jain

•

Updated: 27 May 2021, 9:35 PM IST

दौसा: नीलकंठ पहाड़ी पर घूमता दिखा पैंथर, लोगों में भय

दौसा: नीलकंठ पहाड़ी पर घूमता दिखा पैंथर, लोगों में भय

दौसा. जिला मुख्यालय स्थित नीलकंठ महादेव की पहाड़ी में पैंथर दिखने से यहां नीलकंठ महादेव मदिर में जाने वाले श्रद्धालुओं एवं किला सागर के मैदान में खेलने जाने वाले वाले लोगों में भय बना हुआ है।पहाड़ी में जाने वाले लोगों का कहना है कि पैंथर आए दिन पहाड़ी इलाके में दिखाई देता है, लेकिन वन विभाग इसको पकडऩे की कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। कई लोगों ने बताया कि पैंथर कभी कभी तो भवानी क्लब के मैदान में भी घूमता दिखाई देता है।

लोगों का कहना है कि नीलकंठ की पहाड़ी के नीचे दौसा शहर बसा हुआ है, यदि पहाड़ी में घूम रहा पैंथर कभी आबादी वाले शहर में आ गया तो हालात बिगड़ सकते हैं। इधर वन विभाग के दौसा रैंजर बबलू मीना एवं फोरेस्टर रामजीलाल मीना ने बताया कि पहाड़ी में अब कोई पैंथर नहीं है। उन्होंने पैंथर को पकडऩे के लिए पिंजरा भी लगाया था, लेकिन नहीं मिला। रैंजर ने बताया कि उनको अंदेशा है, जो पैंथर पिछले महीनों श्यालावास में एक मकान में जाकर छिपा था, शायद यह वही पैंथर था। फिर भी एहतियात के तौर पर उसको ढूंढने के लिए वनकर्मियों की टीम लगाई जाएगी।

इस बार जून में होगी वन्यजीव गणना
दौसा. प्रदेश में हर वर्ष 24 से होने वाली वन्य जीव गणना इस बार 24 जून से होगी। दौसा रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी बबलू मीना ने बताया कि गर्मियों में हर वर्ष मई महीने में वन्य जीवों की गणना होती है, लेकिन इस बार बरसात हो गई और कोरोना काल चल रहा है। इसलिए सरकार ने वन्यजीवों की की गणना 24 जून से कराने का निर्णय किया है। रैंजर ने बताया कि मई महीने में वन्यजीव गणना इसलिए होती है, कि गर्मियों में वनों के कुछ चिह्नित स्थानों पर ही पानी रहता है।

वन्यजीव चौबीस घंटे में एक बार पानी वाले स्थानों पर पानी पीने जरूरत आते हैं। तब वन्यजीवों की गणना होती है। उन्होंने बताया कि बरसात होने से वनों एवं पहाड़ी इलाकों में जगह- जगह छोटी - छोटी तलाइयां पानी से भर गई है। वहीं पहाड़ी इलाकों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में गणना जून में होगी।