लालसोट. कभी मौसम की मार तो कभी बंपर पैदावार की मार धरती पुत्र यानि किसानों को झेलनी पड़ती है। लालसोट की थोक सब्जी मंडी में पिछले कई दिनों से कई सब्जियों की जबरदस्त आवक व खरीदारों की कमी से किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल रही है। औने-पौने दामों में भी खरीदार नहीं मिलने से इन सब्जियों की जमकर दुगर्ति हो रही है। जानकारी के अनुसार गत एक सप्ताह से गौरव पथ स्थित थोक फल सब्जी मंडी में लौकी, भिंडी, खीरा, टिंडा एवं बैंगन की आवक में काफी बढ़ोतरी हुई है, इनमे लौकी व भिंडी की तो बंपर आवक हो रही है, लेकिन अब इनके खरीददार भी गायब हो गए है। आलम यह है कि कुछ दिनों पूर्व तक थोक में 15 से 20 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकने वाली लौकी इन दिनों एक रुपए किलो भीं नहीं बिक रही है। थोक मंडी में बीस किलों की वजनी लौकी की थैली को बीस रुपए में भी लेने के लिए कोई ग्राहक नहीं है। यही हालात भिंडी की भी हो रही है। भिंडी अब दो से तीन रुपए किलों में भी नहीं बिक रही है। टिंडा व खीरा के दाम भी काफी कम लग रहे है। जहां गत दिनों तक थोक सब्जी में सुबह आठ नौ बजे तक अधिकांश सब्जियां बिक जाती थी, लेकिन अब दस बजे बाद भी लौकी, भिंडी समेत कई सब्जियां बिना बिकी रह जाती है।
लागत तो दूर, भाड़ा भी नहीं निकल रहा है
लालसोट की थोक सब्जी मंडी में प्रतिदिन आसपास के कई गांवों से सैकड़ों किसान अपनी सब्जियों को लेकर पहुंचते है, लेकिन मंंडी में लौकी, भिंडी व अन्य सब्जियों के दाम एक साथ गिरने से वे काफी मायूस है। रामपुरा गांव निवासी किसान छोटूलाल एवं डिडवाना गांव निवासी किसान राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इन दामों से उनकी लागत से दूर, सब्जियों को गांव से मंडी तक लाने का भाड़ा भी नहीं निकल रहा है। आढ़तियों की दुकान पर घंटों तक खरीदार नहीं आने के बाद वे इन्हे आढ़तिए के भरोसे ही छोड़कर अपने गांव चले जाते है। कई बार गोशाला के लिए सब्जियां भेजनी पड़ती है।