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Mangla Pashu Bima Yojana: राजस्थान में 21 लाख मवेशियों का बीमा कब? पशुपालकों का पशुपालन व्यवसाय से मोहभंग

Rajasthan Mangla Pashu Bima Yojana: बजट में नई योजना मंगला पशु बीमा योजना को लागू करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

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दौसा

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Anil Prajapat

Sep 23, 2024

Mangla Pashu Bima Yojana

Dausa News: दौसा। कृषि अर्थव्यस्था की रीढ़ होने के बावजूद जिले सहित प्रदेश में दुधारू पशु नि:शुल्क बीमा योजना के दायरे में नहीं है। नई सरकार ने पूर्व में चलने वाली बीमा योजना का अघोषित रूप से बंद कर दिया। राजस्थान बजट में नई योजना मंगला पशु बीमा योजना को लागू करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

मंगला योजना के तहत प्रदेश में 21 लाख मवेशियों का बीमा करने का प्रावधान रखा गया था। इसके लिए चार सौ करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान कर गाय, भैंस, भेड़ बकरी व ऊंट का बीमा करवाना था। अब तक मंगला योजना की गाइडलाइन तक तैयार नहीं की गई है। इसका नतीजा है प्रदेश के पशुपालक पशोपेश में हैं।

पूर्व में लम्पी संक्रमण के दौरान लाखों रुपए की कीमत वाले दुधारू पशुओं को गंवा चुके पशुपालकों को निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम की मोटी रकम चुका कर दुधारू पशुओं का बीमा करवाना पड़ रहा है। इधर लम्पी संक्रमण काल के दौरान वास्तविक रूप से मरने वाले मवेशियों के मुआवजे की राशि देने को लेकर भी सरकार ने चुप्पी साध रखी है।

पुरानी योजना का ऐसा हुआ हाल

पूर्व में मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना में एक परिवार से अधिकतम दो-दो दुधारू पशुओं का बीमा कवर होना था। दुधारू पशुओं की मृत्यु पर अधिकतम 40 हजार प्रति पशु बीमा मिलना था। इस योजना में वार्षिक आठ लाख रुपए आय वाले पशुपालकों को शामिल किया है। इसकी प्रीमियम राशि राज्य सरकार को वहन करनी थी। योजना में पशु चिकित्सकों को पशुपालकों के यहां जाकर बीमा करना था, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त भत्ता आदि देय नहीं होने से चिकित्सक हड़ताल पर चले गए।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद करीब सप्ताह भर बाद हड़ताल समाप्त हुई। इसके बाद चुनाव आचार संहिता लगने से योजना पर फिर कोई काम ही नहीं हो पाया। कई जिलों में योजना में कुछ आवेदन लिए गए, लेकिन इन आवेदनों की न तो समुचित तरीके से स्क्रीनिंग हो पाई और न बीमा हो पाया। पूर्व में कांग्रेस सरकार की ओर से लगाए गए महंगाई राहत शिविर में 90 लाख परिवारों के एक करोड़ से ज्यादा दुधारू गाय व भैंस के बीमा के लिए पंजीयन करवाए गए थे।


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पशुपालन व्यवसाय से मोहभंग

बीसवीं पशुगणना रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में कुल पशुधन 5.68 करोड़ रही है, जबकि वर्ष 2012 में 5.77 करोड़ था। हर जिले में पशुओं की संख्या में कमी देखी गई थी। वर्तमान में बढ़ती महंगाई के चलते भी पशुपालन व्यवसाय से लोगों का मोह भंग हो रहा है।

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इनका कहना है…

मंगला बीमा योजना से पशुपालकों को राहत है। गाइड लाइन मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
-डॉ. प्रहलाद मीना, उप निदेशक पशुपालन विभाग दौसा

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