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घर-घर नलों में पानी पहुंचाने की कवायद

बासना नदी से आएगा पानी, पांच लाख लीटर क्षमता की टंकी निर्माण शुरू
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दौसा

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Rajendra Kumar Jain

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Updated: 1 Feb 2021, 9:40 AM IST

घर-घर नलों में पानी पहुंचाने की कवायद

पापड़दा कस्बे में जलापूर्ति के लिए किया जा रहा टंकी का निर्माण।

दौसा. जिले के पापड़दा कस्बे में जलापूर्ति के लिए पांच लाख लीटर की पानी की क्षमता की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। इससे कस्बे में लगे नलों में घर-घर पानी पहुंचाया जाएगा। इस टंकी में पानी भरने के लिए बासना की नदी में बोरवेल खुदाई का काम चल रहा है।
पापड़दा कस्बे में पहले भी पानी की टंकी थी, लेकिन कस्बे की आबादी बढऩे के साथ ही जलदाय विभाग व सरकार ने पांच लाख लीटर की क्षमता की एक टंकी और तैयार करवाई है। जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन दोनों टंकियों में पानी की आपूर्ति के लिए अरावली पहाड़ी की तलहटी में बासना नदी में अब और बोरवेल खुदवाए हंै। ग्रामीणों ने बताया कि यदि इन बोरवेल में भरपूर मात्रा में पानी की आवक हो जाएगी तो कस्बे में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। पापड़दा में जलदाय विभाग ने कई जगह एकल बिंदु व हैंडपंप लगाए, लेकिन भूमिगत जल गिरने के कारण अधिकांश नलकूप एवं हैंडपंप नकारा हो गए हैं। इससे लोगों को समय पर पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से लाखों की लागत से परियोजना स्वीकृत कर कस्बे में 5लाख लीटर की क्षमता की एक टंकी का निर्माण और करवाया जा रहा है।
पाइप लाइन बिछाई जाएगी: जलदाय विभाग के अभियंताओं ने बताया कि बासना नदी से पानी आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाई जाएगी । इसके अलावा कस्बे के जिन इलाकों में पाइप लाइनों की कमी है, वहां भी नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। जो पाइप लाइनें चौक हो रही है, उनकी भी मरम्मत कराई जाएगी। ताकि हर घर पानी पहुंच पाए।
टैंकरों से हो रही है आपूर्ति : कस्बे में पानी की कमी के कारण है वर्तमान में ग्राम पंचायत सरपंच हेमंत मीणा द्वारा टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। यह सप्लाई पिछले कई महीनों से जारी है। कस्बे में लगे अधिकांश बोरवेल में हैंडपंप सूख गए हैं।
पांच सौ फीट तक पहुंच गया भूमिगत जल : कस्बे में भूमिगत जल की स्थिति बहुत ही खराब है। जानकारी के अनुसार कस्बे में वर्तमान में भूमिगत जल 500 से 700 तक के गहराई तक पहुंच गया है। जिन लोगों ने अपनी निजी बोरवेल खुदवा रखे हैं, उनमें भी पानी की कमी आ गई है। सरकारी हैंडपंप बोरवेल अधिकांश से नकारा साबित हो गए हैं। ऐसे में अब कस्बे में पानी की आपूर्ति के लिए बासना नदी में बोरवेल खुदवाए जा रहे हैं।