
Dewas liquor deaths case:देवास में कथित 'डायरी सिस्टम' से बिकती रही शराब (फोटो सोर्स- Patrika)
Dewas liquor deaths case: मध्य प्रदेश के देवास के ग्राम चंदाना व बिंजाना में शराब पीने के बाद 10 लोगों की संदिग्ध मौतों और एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी जाने के मामले ने आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से घर से ही अवैध शराब बेची जा रही थी, लेकिन जिम्मेदारों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब जब जनहानि हो गई है, तो धरपकड़ और पूछताछ का दौर शुरू हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, विनोद नामक व्यक्ति कथित तौर पर गांव में देशी शराब बेचता था और ज्यादातर स्थानीय ग्राहक उसी से शराब खरीदते थे। सूत्रों के अनुसार, शराब की आपूर्ति में कथित 'डायरी सिस्टम' का भी इस्तेमाल होता था। हालांकि, इस कथित नेटवर्क और मौतों के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में घटना की खबर फैलने के बाद विनोद गांव छोड़कर चला गया था। 16 अक्टूबर के आसपास दो लोगों की जान चली गई और जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद आबकारी विभाग की टीम उसके घर पहुंची, लेकिन वहां ताला मिला। बताया जाता है कि टीम ने ताला खुलवाकर तलाशी ली, हालांकि शराब नहीं मिली। पुलिस भी उसकी तलाश में जुटी थी। कहा जा हरा है कि करीब तीन दिन पहले उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस ने हिरासत में लेने की पुष्टि नहीं की है।
ग्रामीणों के अनुसार, विनोद लंबे समय से शराब के कारोबार से जुड़ा रहा है। बताया जाता है कि पहले उसके परिवार के पास एक-दो शराब ठेके थे। बाद में वह चंदाना में संचालित शराब दुकान पर भी काम करता था। जब दुकान चंदाना से हटाकर देवास के मेंढकी रोड पर शिफ्ट हुई, तो आरोप है कि उसने गांव में घर से ही अवैध रूप से शराब बेचना शुरू कर दिया। आरोप है कि वह कथित 'डायरी सिस्टम' के तहत शराब लाकर गांव में बेचता था। यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल उठता है कि गांव में लंबे समय तक चल रही कथित अवैध बिक्री की भनक संबंधित विभागों को क्यों नहीं लगी और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
शनिवार को मामला सामने आने के बाद फूल सिंह के घर पुलिस की टीम पहुंची थी और उन्हें अपने साथ ले गई थी। फूल सिंह की पत्नी जानीबाई ने बताया कि हमें सुबह 8 बजे घर से ले गए और कहा कि थाना पर बयान लेना है। एक घंटे तक सिविल लाइन थाने बिठाए रखा। बाद में वहां से इधर-उधर घूमाकर बाजार में ले गए। कुछ देर वहां बिठाया। जब हमने घर वापस छोड़ने का बोला तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि अमलतास ले जाना है, वहां आपकी जांच होगी। इसके बाद वापस चंदाना रोड पर लाए तभी नंदानगर नाले के पास पीछे से एक गाड़ी में आए अधिकारी ने हमारी गाड़ी रुकवा दी। जानीबाई ने बताया कि वहां भी करीब एक घंटे तक बिठाए रखा। जब चंदाना स्थित घर से होकर अमलतास अस्पताल चलने को कहा तो सीधे न आकर बीमा चौराहा, उज्जैन रोड होकर वहां 2 बजे तक 7-8 जांच कराई और नीचे छोड़ दिया, पुलिसकर्मी जांच रिपोर्ट लेकर ऊपर चले गए। हम दोनों 2 से लेकर 4.30 बजे तक नीचे ही बैठे रहे। जब मैं इनको लेकर रोड पर आ गई तब हमें वापस घर पहुंचाया गया।
'पत्रिका' टीम रविवार को चंदाना पहुंची और आंखों की रोशनी गंवाने वाले फूलसिंह से बात की। फूलसिंह के बेटे किशोर और बड़े भाई बालूराम परमार का भी पिछले दिनों निधन हो चुका हैं। फूलसिंह ने बताया कि 15 अक्टूबर की सुबह उसने गांव से खरीदी देशी शराब का आधा क्वार्टर पिया था। सुबह से शाम तक उसे कोई परेशानी नहीं हुई। इस दौरान वह दो लोगों के अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ। शाम को गांव की एक दुकान पर बैठने के बाद जब घर लौटा, तो धुंधला दिखाई देने लगा। वह किसी तरह घर पहुंचा और ऊपर के कमरे में चला गया। फूलसिंह के मुताबिक, रात में खाना खाने के बाद सो गया था। इसी दौरान उल्टी हुई। अगली सुबह करीब आठ बजे उसे दिखना बंद हो गया। डॉक्टरों ने आंख की झिल्ली खराब होने और सूजन आने की बात कही है। हालांकि, उसकी आंखों की रोशनी जाने का कारण और इसका शराब से संबंध जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
संदिग्ध मौतों के मामले में पुलिस अब विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस की अलग-अलग टीमें संदेहियों से पूछताछ कर रही हैं।
फूल सिंह के छोटे बेटे किशोर परमार की 27 सितंबर को जान चली गई थी। किशोर के परिवार में अब पिता फूलसिंह, माता जानीबाई, पत्नी मीना, दो बेटे और किशोर के भाई राजेश व उसका परिवार है। राजेश भी अकसर बीमार रहता है। किशोर की पत्नी मीना का कहना है कि परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं है। दोनों बच्चे फिलहाल 8वीं व 9वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। सरकार से हमारी मांग है कि हमारी सहायता करें। कमाने वाले पिताजी के आंखों की रोशनी भी चली गई है। उनका उपचार कराने के लिए भी खर्च महंगा है। डॉक्टर ने जांच के बाद इंजेक्शन के लिए बोला है लेकिन वह इंजेक्शन ही 50 हजार रुपए का एक आएगा। ऐसे में हम आगे क्या करेंगे।
फिलहाल मृतकों की विसरा रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस की अलग-अलग टीमें संदेहियों से लगातार पूछताछ कर रही हैं।- पुनीत गेहलोद,एसपी, देवास
Updated on:
26 Oct 2026, 8:57 AM IST
Published on:
26 Oct 2026, 8:57 AM IST
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