
Ram Van Gaman Marg project evidence of Ramayana sitavan dewas (फोटो- सोशल मीडिया)
evidence of Ramayana: विगत दिनों सरकार ने आगामी दीपोत्सव पर राम वनगमन मार्ग (Ram Van Gaman Marg) को चिन्हित करते हुए रास्ते में आने वाले सभी धार्मिक स्थलों पर भव्य आयोजन की तैयारी के निर्देश दिए लेकिन इस सूची में देवास जिले के सीतावन (Sitavan) परिक्षेत्र का कोई उल्लेख नहीं है। धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो सीतावन क्षेत्र में बिखरे प्राचीन अवशेष और मान्यताएं स्पष्ट संकेत देती है कि यह स्थान भी राम वनगमन पथ का साक्षी रहा है।
सबसे प्रमुख प्रमाण है पीपरी के समीप स्थित सदियों पुराना प्राचीन सीता मंदिर जहां खुदाई के दौरान अति प्राचीन धार्मिक अवशेष प्राप्त हुए। इसी क्षेत्र में लव-कुश आश्रम भी हैं। इसके विषय में मान्यता है कि माता सीता ने यही लव-कुश को जन्म दिया था। सीता वन परिक्षेत्र की विशेषता यह भी है कि यहां विश्व का एकमात्र मंदिर है जहां पूरा राम परिवार एक ही छत के नीचे विराजमान है। समीप ही सीता समाधि स्थल बताया जाता है जहां माता सीता ने अपनी इच्छा से भूमि समाधि ली थी। पास से बहने वाली नदी को घोड़ा पछाड़ कहा जाता है। (mp news)
मान्यता है कि अश्वमेध यज्ञ के दौरान भगवान राम द्वारा छोड़े गए घोड़े को लव-कुश ने यहीं पकड़ा था। बागली के निकट स्थित जटाशंकर (जटायु तपस्थली), च्यवन ऋषि आश्रम चंद्रकेसर, महाभारत कालीन कावड़िया पहाड़, पांडव कालीन शिव मंदिर जामवंतगढ़ आदि स्थल भी इस विरासत के प्रमाण है।
सबसे बड़ा ऐतिहासिक साक्ष्य है अखिलेश्वर मठ, जहां मान्यता है कि रामेश्वरम में भगवान शिव की स्थापना हेतु श्रीराम के आदेश पर हनुमान नर्मदा कुंड से शिवलिंग लाते समय यहीं कुछ देर विश्राम किए थे। यहां स्थित प्रतिमा विश्व में अद्वितीय है क्योंकि इसमें हनुमान अपने कंधे पर शिवलिग लिए विराजमान है। (mp news)
पूर्व विधायक एवं हस्तशिल्प विकास निगम के अध्यक्ष रहे तेजसिंह सेंधव ने भी अपनी पुस्तक में इन धार्मिक विरासतो का विस्तार से उल्लेख किया है। बोल बम कावड़ यात्रा के संयोजक गिरधर गुप्ता का कहना है कि यदि सीता मंदिर और आसपास के क्षेत्र की पुरातात्विक खोज की जाए तो यहां राम वनगमन के अनेको साक्ष्य मिलेंगे।
हरकचंद माहेश्वरी, भगवानभाई गुप्ता, श्यामलाल अग्रवाल का कहना है कि इस क्षेत्र को मोहन यादव सरकार द्वारा राम वनगमन पथ में शामिल करना चाहिए। इससे यहां का विकास भी होगा लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इस विषय में विधायक मुरली भंवरा बताया कि वह पुरातत्व विभाग से इन स्थलों को चिन्हित करवाकर उनके धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने का प्रयास करेंगे। (mp news)
Updated on:
14 Sept 2025 11:51 am
Published on:
14 Sept 2025 11:51 am
