
मास्टर प्लान, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Dhar news: मध्यप्रदेश के धार जिले में अगले 15 साल के विकास की दिशा तय करने वाले मास्टर प्लान के प्रारूप पर ही सवालों की बौछार हो गई है। वर्ष 2041 तक तीन लाख की आबादी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए प्रथम प्रारूप पर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएनसीपी) कार्यालय में करीब 300 दावे-आपत्तियां पहुंची है। सबसे ज्यादा विरोध कंजर्वेशन यानी संरक्षित क्षेत्र में जमीन शामिल किए जाने को लेकर है। करीब 200 आवेदन इस भूमि को कंजर्वेशन से मुक्त कर आवासीय या मिश्रित उपयोग में शामिल करने की मांग से जुड़े है।
विकास क्षेत्र की करीब 30 प्रतिशत जमीन कंजर्वेशन के दायरे में होने से जमीन के उपयोग को लेकर विवाद गहरा गया है। विधायक नीना विक्रम वर्मा से लेकर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मुजीब कुरैशी, बस स्टैंड व्यापारी संघ और बस ऑपरेटर संघ ने भी प्रारूप के अलग-अलग प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराई है। अब इन दावे-आपत्तियों पर इसी माह अंत तक सुनवाई करने की तैयारी है।
नवीन मास्टर प्लान के प्रस्तावित विकास क्षेत्र में 820 हेक्टेयर जमीन कंजर्वेशन के लिए चिह्नित है, जो कुल क्षेत्रफल का 27.33 प्रतिशत है। इतनी बड़ी भूमि संरक्षित क्षेत्र में शामिल होने से उसके आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। इसी कारण जमीन मालिकों और अन्य आवेदकों ने कंजर्वेशन का दायरा घटाने की मांग की है। पहली बार मास्टर प्लान में मिश्रित उपयोग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिसके तहत निर्धारित भूमि पर आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ संचालित हो सकेंगी। लिहाजा, कई आवेदक अपनी जमीन को संरक्षित क्षेत्र से निकालकर आवासीय या मिश्रित उपयोग में दर्ज कराना चाहते हैं।
कंजर्वेशन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा विकास योजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता को भी प्रभावित कर रहा है। मेडिकल कॉलेज और थोक सब्जी मंडी जैसे सार्वजनिक महत्व के प्रोजेक्ट के लिए कंजर्वेशन में दर्ज जमीन आवंटित करने के बाद उसका भूमि मद बदलना पड़ा। हालांकि, पर्यावरणीय बदलाव, भूजल स्तर में गिरावट और मौसम चक्र में परिवर्तन के बीच ग्रीन बेल्ट और संरक्षित क्षेत्र को कम करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वहीं करीब एक लाख की वर्तमान आबादी वाले शहर में सार्वजनिक पार्किंग स्थल घोषित नहीं होने का मुद्दा भी आपत्तियों में शामिल है।
प्रारंभिक मास्टर प्लान प्रकाशित करने और दावे-आपत्तियां आमंत्रित करने का उद्देश्य नागरिकों से सुझाव लेकर प्रारूप को बेहतर बनाना है। इस माह के अंत तक सभी आपत्तियों पर सुनवाई करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुनवाई के बाद समिति के दिशा-निर्देश वरिष्ठ कार्यालय को भेजे जाएंगे। कंजर्वेशन भूमि से जुड़ा मामला शासन स्तर का है। सभी आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में छह से सात महीने की संभावना है। - सुनील जॉन मिंज, संयुक्त संचालनक टीएनसीपी धार
कंजर्वेशन क्षेत्र घटाकर आवासीय भूमि बढ़ाने की मांग के सामने पुराने मास्टर प्लान का अनुभव भी चुनौती पेश कर रहा है। वर्ष 2021 के प्लान में एक लाख की आबादी के अनुमान पर 979.30 हेक्टेयर आवासीय क्षेत्र प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसमें से केवल 590.48 हेक्टेयर भूमि ही विकसित हो सकी। पुराने प्लान की शेष भूमि को शामिल करते हुए नए प्रारूप में आवासीय क्षेत्र का कुल प्रस्तावित रकबा 1569.78 हेक्टेयर किया गया है। इसके बावजूद कंजर्वेशन की जमीन को बड़े पैमाने पर आवासीय उपयोग में बदलना आसान नहीं होगा। नवीन प्रारूप में पहली बार 322.83 हेक्टेयर क्षेत्र मिश्रित उपयोग के लिए प्रस्तावित किया गया है। इससे आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग जमीन की जरूरत को कुछ हद तक पूरा करने की योजना है।
Updated on:
21 Oct 2026 02:16 pm
Published on:
21 Oct 2026 02:16 pm
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