
devi durga puja on tuesday
हिंदू धर्म में सप्ताह के हर दिन के लिए किसी एक देवी या देवता को कारक देव माना जाता है। वहीं इन कारक देव के अलावा भी उस निश्चित दिन कुछ खास देवी देवताओं के पूजन का विधान होता है। ऐसा ही एक विशेष साप्ताहिक दिन है मंगलवार जिसके कारक देव तो हनुमान जी माने जाते हैं। लेकिन इस दिन माता भगवती यानि देवी मां दुर्गा की पूजा का भी विशेष विधान माना गया है।
ऐसे समझें सप्ताह के दिनों के कारक देव और अन्य देवों के पूजन का विधान...
सोमवार : भगवान शिव : - : चंद्रमा
मंगलवार : श्री हनुमान जी : देवी मां दुर्गा : मंगलदेव
बुधवार : श्री गणेश : - : बुध देव
गुरुवार : भगवान श्रीहरि विष्णु : सरस्वती : देवगुरु बृहस्पति
शुक्रवार: देवी लक्ष्मी: मां दुर्गा,माता संतोषी, वैभव लक्ष्मी : शुक्र देव
शनिवार : शनि देव: मां काली, हनुमान जी, बाबा भैरव
रविवार: सूर्य नारायण देव : - : सूर्य देव
इस आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2021 में पहला मंगलवार यानि देवी दुर्गा का विशेष दिन 13 जुलाई 2021 को पड़ रहा है। ऐसे में देवी दुर्गा के इस पर्व पर उनके ही खास साप्ताहिक दिन किए जाने वाले पूजन का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का पूजन श्रद्धापूर्वक करने से हर तरह की भौतिक और आध्यात्मिक कामनाएं पूरी होती हैं।
वहीं हिंदुओं के इस नवसंवत्सर 2078 के राजा व मंत्री दोनों ही मंगल हैं, ऐसे में जानकारों का कहना है कि देवी का दिन भी मंगलवार होने के कारण और साथ ही गुप्त नवरात्र होने के कारण इस दिन की गई देवी मां की पूजा विशेष लाभकारी रहेगी। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस दिन देवी मां की पूजा की विधि इस प्रकार है।
देवी माता दुर्गा की पूजन सामग्री...
शक्ति की देवी मां दुर्गा के पूजन के लिए पूजा की सामग्री में पंचमेवा, पंचमिठाई, गाय का घी,रूई, कलावा, रोली, सिंदूर, पानी वाला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते 5, चौकी, कलश, आम का पल्लव, समिधा, कमल गट्टे, पंचामृत की थाली, कुशा, लाल चंदन, जौ, तिल, सोलह श्रृंगार का सामान, लाल फूलों की माला की आवश्यकता होती है।
ऐसे करें देवी माता दुर्गा का पूजन...
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कार्यों के बाद दुर्गा के आवाहन के लिए सबसे पहले उनके मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मंत्र:- सर्व मंगल मागंल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
फिर देवी माता को इस मंत्र के साथ आसन अर्पित करें -
मंत्र :- श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
आसानार्थे पुष्पाणि समर्पयामि॥
फिर देवी माता को इस मंत्र के साथ अर्घ्य अर्पित करें -
मंत्र :- श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
हस्तयो: अर्घ्यं समर्पयामि॥
इसके बाद देवी माता को इस मंत्र के साथ पंचामृत स्नान कराएं -
मंत्र :- श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
पंचामृतस्नानं समर्पयामि॥
फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं
मंत्र :- श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि॥
इसके बाद देवी मां को इस मंत्र से आचमन कराएं-
मंत्र :- शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
फिर ये पदार्थ एक एक करके देवी मां को अर्पित करें-
- वस्त्र अर्पित करें।
- सौभाग्य सू़त्र अर्पित करें।
- चन्दन अर्पित करें।
- कुंकुम अर्पित करें।
- आभूषण अर्पित करें।
- पुष्पमाला अर्पित करें।
- नैवेद्य प्रसाद अर्पित करें।
- ऋतुफल अर्पित करें।
- श्रद्धापूर्वक धूप-दीप से आरती करें।
इस विधि से आवाहन पूजन के बाद इनसें से किसी भी एक मंत्र का जाप जो मनोकामना हो उसके पूर्ण होने की कामना से करें।
- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥
- देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
- देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
- प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
इस दिन मां दुर्गा के देवी सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। देवी सहस्त्रनाम में देवी के एक हजार नामों की सूची है। इसमें उनके गुण हैं व कार्य के अनुसार नाम दिए गए हैं। सहस्त्रनाम के पाठ करने का फल भी महत्वपूर्ण है। देवी सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए इन नामों से हवन करने का भी विधान है। इसके अंतर्गत नाम के पश्चात नमः लगाकर स्वाहा लगाया जाता है।
इसके अलावा इस दिन दुर्गा सप्तशती व दुर्गा चालीसा का भी पाठ किया जाना चाहिए।
Published on:
13 Jul 2021, 12:50 AM IST
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