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इस विधि से यज्ञ करने पर गंभीर रोग भी होंगे सिर्फ 2 दिन में ठीक

इस विधि से यज्ञ करने पर गंभीर रोग भी होंगे सिर्फ 2 दिन में ठीक

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Shyam Kishor

Jun 01, 2018

rog ke totake

इस विधि से यज्ञ करने पर गंभीर रोग भी होंगे सिर्फ 2 दिन में ठीक

किसी भी बीमारी से ग्रसित होने पर अक्‍सर लोग डॉक्‍टर के पास जाते हैं और उनकी सलाह के अनुसार दवाएं भी लेते हैं, परंतु कई बार हर प्रकार के इलाज के बावजूद भी कुछ रोग दूर नहीं होते । कभी कभी डॉक्टरों को भी किसी गंभीर बीमारी की मूल वजह पता ही नहीं चल पाती और ऐसे में धन और समय दोनों ही बेकार जाते हैं । लेकिन तंत्र शास्त्र में कुछ ऐसे सिध्द मंत्र बताएं गये हैं जिनका सही तरीके से प्रयोग करने पर गंभीर से गंभीर बीमारी कुछ ही दिनों पूरी तरह ठीक हो जाती हैं । अगर आध्‍यात्‍म‍िक नजरिए से देखा जाए तो हर तरह के रोगों के मूल कारण मनुष्य के पूर्व जन्‍म या इस जन्‍म के पाप ही होते हैं, इसलिए तो आयुर्वेद में लिखा गया है कि ऐसी परिस्थिति में मनुष्य को देवताओं की शरण में जाना चाहिए और उनके दिव्य मंत्रों का जप व यज्ञ करने से ही शारीरिक और मानसिक रोग दूर हो जाते हैं ।

मंत्र प्रयोग विधि


- रात्रि 11 बजे से 2 बजे तक या फिर सुबह 4 बजे से 7 बजे तक के समय में ही करें ।
- घर के पूजा स्थल पर भगवान अमृतेश्वर मृत्युंजय शिव आवाहन करें ।
- आटे से बना हुआ दीपक में गाय का घी डालकर जलायें ।


- कंबल के आसन पर बैठकर नीचे दिये गये दोनों मंत्र का 1100 बार जप करें ।
- जप करते समय जो रोगी है उसका मन ही मन स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करें ।
- जप पूरा होने के बाद हवन, यज्ञ करें ।


- जिन मंत्रों का जप किया हैं उन्हीं मंत्रों से रोगी के ठीक होने की भाव से- गाय के शुद्ध घी से 108 + 108 हवन करें ।
- गाय के शुद्ध घी की आहुति देने के बाद नीचे दी गई हवन सामग्री से भी 108 बार आहुति देना हैं ।

अमृतेश्वर मृत्युंजय मंत्र

।। ऊँ श्री हृीं मृत्युंजये भवगती चैतन्य चन्दे हंस संजीवनी स्वाहा ।।

गायत्री मंत्र
।। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।


यज्ञ के लिए विशेष हवन सामग्री

1- पीली सरसों 250 ग्राम,
2- राई 250 ग्राम,
3- लाजा 500 ग्राम,
4- वालछड़ 10 ग्राम,
5- काली मिर्च 100 ग्राम,
6- बूरा 500 ग्राम,
7- शहद 200 ग्राम,
8- हल्दी 200 ग्राम,
9- लौंग 5 नग,
10- इलाइची 5 नग,
11- गाय के दुध की बनी खीर 100,


ग्राम इन सभी को घी में मिलाकर तैयार हुई हवन सामग्री से आहुति यज्ञ में आहुति देने के बाद एक सुखे नारियल के गोले को पूर्णाहूती के रूप में यज्ञ में छोड़े ।

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इसे पूरे विधान से करने के बाद आप देखेंगे की जिस रोगी को डॉक्टर भी ठीक नहीं कर पायें उस रोगी को दूसरे दिन ही मरीज़ को लाभ हो जायेगा ।