
केराकल संरक्षण पर आयोजित संगोष्ठी में मौजूद लोग
धौलपुर. वन्यजीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत प्रादेशिक वन मंडल धौलपुर तथा धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व डीकेटीआर धौलपुर के संयुक्त तत्वावधान में यहां एक रिसोर्ट में वन्यजीव कैराकल संरक्षण संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को पौधे भेंट कर स्वागत के साथ हुई। इसके बाद उप वन संरक्षक डीकेटीआर तेजस पाटिल ने धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के बारे में जानकारी दी।
मुख्य वक्ता के रूप में रणथंभौर स्थित संस्था टाइगर वॉच के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ.धर्मेंद्र खांडल ने कैराकल की जैविकी, पारिस्थितिकी, इतिहास और भारत में इसके वितरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने धौलपुर के वन क्षेत्र में कैराकल के महत्व और इसके संरक्षण के तरीकों के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने इस लैंडस्केप में पाए जाने वाले भेडिय़ा सहित अन्य छोटे मांसाहारी वन्यजीवों पर भी प्रकाश डाला। डॉ.खांडल की टीम वर्तमान में करौली.धौलपुर.बंध बारैठा लैंडस्केप में कैराकल के आवास का सर्वेक्षण कर रही है।
तेजी से आई गिरावट
उन्होंने बताया कि आजादी से पहले कैराकल देश के लगभग 7.94 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाया जाता था, जो वर्ष 2020 तक घटकर केवल 16,709 वर्ग किलोमीटर रह गया। यह करीब 95.95 प्रतिशत की गिरावट है। आज इसकी बची हुई आबादी मुख्य रूप से राजस्थान के कुछ हिस्सों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि डीकेटीआर लैंडस्केप में कैराकल की देश में सबसे ज्यादा आबादी है, इसलिए इस क्षेत्र में इसके संरक्षण की विशेष आवश्यकता है।
बड़े वन्यजीवों के साथ छोटे भी महत्वपूर्ण
उप वन संरक्षक प्रादेशिक धौलपुर वी.चेतन कुमार ने कहा कि कैराकल धौलपुर का गौरव है। जंगल के संतुलन में बड़े जीवों के साथ.साथ कैराकल जैसे छोटे मांसाहारी वन्यजीवों की भी उतनी ही अहम भूमिका है, इसलिए इनका संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। उप वन संरक्षकए डीकेटीआर पाटिल ने कहा कि डीकेटीआर इस मायने में अनूठा है कि यहां कैराकल की सबसे बड़ी आबादी है, जो देश के अन्य टाइगर रिजर्व में नहीं मिलती। यह इस रिजर्व की खास पहचान है और इसे बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। व्याख्यान के बाद अतिथियों के बीच कैराकल संरक्षण पर चर्चा हुई तथा फील्ड स्टाफ और प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछे। संगोष्ठी में सहायक वन संरक्षक चेतराम मीना, सहायक वन संरक्षक राजीव शर्मा, वन्यजीव प्रेमी राजीव तोमर, प्राणीशास्त्र के प्राध्यापक प्रो.विनय भारद्वाज सहित क्षेत्रीय वन अधिकारी, वन विभाग का फील्ड स्टाफा, वन्यजीव प्रेमी आदि मौजूद रहे।
Updated on:
08 Oct 2026 06:45 pm
Published on:
08 Oct 2026 06:45 pm
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