
60 वर्ष से अधिक उम्र के 50 फीसदी लोगों को है रुमेटॉयड आर्थराइटिस। 100 से अधिक हैं आर्थराइटिस के प्रकार। इसमें ऑस्टियो व रुमेटॉयड प्रमुख प्रकार हैं। 30 मिनट की एक्सरसाइज जैसे जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक व साइक्लिंग रोजाना करें।
शरीर की हड्डियों के जोड़ों में घिसावट ही आर्थराइटिस (गठिया) है। इससे रोगी की दिनचर्या प्रभावित होती है। इसके 100 से अधिक प्रकार हैं, जिसमें से ऑस्टियो व रुमेटॉयड मुख्य प्रकार हैं। इस रोग से खासतौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के 50 फीसदी लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं।
प्रमुख लक्षण-
आर्थराइटिस में जोड़ों के घिसने से दर्द के साथ सूजन और अकड़न होती है। मरीज को सीढ़ियां चढ़ने-उतरने और उठने-बैठने में परेशानी होती है। समस्या अधिक समय तक रहने पर हड्डियां टेढ़ी होने लगती। सुबह उठने पर मरीज को जकड़न और सुस्ती महसूस होती है।
ये हैं कारण-
आर्थराइटिस कई कारणों से होता है। ऑस्टियो आर्थराइटिस अधिक उम्र के कारण होने वाला रोग है। रूमेटाइड आर्थराइटिस कम उम्र के लोगों में भी होता है। इसका मुख्य कारण ऑटो इम्यून डिसऑर्डर है जिसमें स्वस्थ कोशिकाएं शरीर के खिलाफ काम करने लगती हैं। बार-बार चोट लगने, अधिक वजन और जोड़ों में इंफेक्शन के कारण भी आर्थराइटिस होता है।
सतर्कता बरतें-
जोड़ों में दो सप्ताह से ज्यादा से सूजन, जकडऩ या दर्द हो या किसी चोट या बिना कारण जोड़ों में दर्द व जकड़न के साथ बुखार रहे तो सतर्क हो जाएं। थोड़ा आराम करने या सोते समय बाजुओं, पैरों या पीठ में दर्द और जकड़न।
इनसे करें परहेज-
खट्टे फल (संतरा, नींबू, टमाटर)
शराब व अन्य नशीले पदार्थ -
चाय, कॉफी, कोल्डड्रिंक्स, सोडा न लें, इनसे यूरिक एसिड बढ़ता है।
त्वचा का रंग अचानक बदलना।
सब्जियों में गोभी, चौला फली, दालें, राजमा व चना आदि कम लें।
ट्रेडमिल, रस्सीकूद, बैडमिंटन न खेलें, इनसे जोड़ों पर दबाव बढ़ने से दिक्कत होती है।
इन्हें खाने से होगा फायदा -
लहसुन का उपयोग ज्यादा करें, यह खून को शुद्ध करता है। अदरक से ब्लड फ्लो ठीक रहता है, जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती। जोड़ों में दर्द होने पर सेब का सिरका खाना लाभकारी होता है। गठिया में सौंफ को किसी भी रूप में खाना फायदेमंद रहता है। कैल्शियम व आयरन युक्त पदार्थ जैसे दूध व दूध से बनी चीजें खाएं। फल, हरी सब्जियां व अंकुरित अनाज को अपनी डाइट में शामिल करें।
ये करें -
हफ्ते में पांच दिन 30 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें। इसमें जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक या साइक्लिंग कर सकते हैं। शरीर में विटामिन-डी की कमी न हो, रोजाना सुबह धूप में 30 मिनट बैठें। वजन न बढ़ने दें क्योंकि इससे जोड़ों पर दबाव पड़ता है। एक ही पोजीशन में लंबे समय तक न बैठें। ठंडे पानी से नहाने से बचें और एसी का इस्तेमाल कम हो या न करें। सर्दी में गुनगुने पानी से नहाएं। स्टीम बाथ या गुनगुने पानी से जोड़ों की सिंकाई में फायदा होता है।
आयुर्वेद -
यह समस्या वात से जानी जाती है। खराब पाचन, खानपान की गलत आदतें व निष्क्रिय जीवनशैली से ऐसा होता है। मरीज रोजाना एक चम्मच हल्दी गुनगुने दूध या पानी के साथ सुबह-शाम ले सकते हैं। कैशॉर गुग्गुल, नवकर्षित चूर्ण व गुडूची का हर तरह से प्रयोग लाभकारी है। रोग के प्रकार के अनुसार महानारायण, दशमूल, महाविषगर्भ आदि तेल से प्रभावित हिस्से की मालिश करते हैं।
होम्योपैथी -
होम्योपैथी में आर्थराइटिस का इलाज हिस्ट्री के आधार पर होता है। अलग-अलग हिस्ट्री होने पर दवा भी बदलती रहती है। अगर सुबह के समय जोड़ों में दर्द-सूजन अधिक है तो रस्टॉक्स देते हैं। जोड़ों में दर्द-सूजन चलने पर बढ़ती है ब्रायोनिया दवा देते हैं। छोटे जोड़ों में दर्द-सूजन के लिए एक्सिया दवा फायदेमंद है। गंभीरता के अनुसार इलाज तय होता है। रोगी बिना डॉक्टरी सलाह के कोई दवा न लें।
Published on:
17 Sept 2019 02:11 pm
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