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डूंगरपुर-बांसवाड़ा के 8 यात्रियों की मौत के पीछे छिपे दर्द के किस्से, दिल झकझोर देगी पिंकी-प्रीत-सूरज और मुकेश की दास्तान

Rajasthan Passengers Bus Crash: हालोल-वडोदरा हाइवे पर ट्रक से टकराई बस में सवार डूंगरपुर-बांसवाड़ा जिले के यात्रियों में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 24 घायल हुए। मृतकों में मजदूर, चालक, महिला और एक मासूम बच्चा शामिल हैं।

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Dungarpur Banswara 8 Passengers Died

हालोल-वडोदरा हाइवे पर डूंगरपुर-बांसवाड़ा के 8 यात्रियों की मौत के पीछे छिपे दर्द के किस्से (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Dungarpur and Banswara Passengers Bus Crash: डूंगरपुर: कहते हैं इंसान घर से सुनहरे सपने, जिम्मेदारियां और अपनों की उम्मीदें लेकर निकलता है, लेकिन किसे पता था कि चंद घंटों का सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। बुधवार तड़के जब हालोल-वडोदरा हाइवे पर बालाजी ट्रैवेल्स की बस एक खड़े ट्रक से टकराई, तो सिर्फ लोहे की बॉडी ही नहीं कटी, बल्कि कई हंसते-खेलते परिवारों के दिल भी हमेशा के लिए टूट गए।

यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं है। बल्कि उन मासूम बच्चों की चीख है, जिनकी मां अब कभी उनके लिए सिलाई का सामान लेकर नहीं लौटेगी। यह उस बूढ़े पिता और तीन छोटी बेटियों का वो आंसुओं का सैलाब है, जिन्होंने अपने परिवार के इकलौते पालनहार को हमेशा के लिए खो दिया। इस भीषण दुर्घटना ने डूंगरपुर के कई गांवों को कभी न भूलने वाला ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसकी टीस ताउम्र महसूस होगी।

बस की लोहे की बॉडी को काटा, फिर निकाला

जानकारी के अनुसार, बालाजी ट्रैवेल्स की बस बांसवाड़ा से सूरत के लिए रवाना हुई थी। इसमें बांसवाड़ा व डूंगरपुर जिले के यात्री भी सवार थे। तड़के वडोदरा के जरोद के समीप तेज रफ्तार बस सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई। टक्कर के बाद बस के आगे का भाग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जब हादसा हुआ तब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। अचानक हुए हादसे के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री अंदर ही फंस गए। उन्हें बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

सूचना पर थाना पुलिस, वडोदरा फायर ब्रिगेड सहित एनडीआरएफ की छठी बटालियन का मुख्यालय होने से बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा। जीएसएफसी, पाणीगेट फायरब्रिगेड एवं इमरजेंसी रेस्पांस सेंटर की टीमें भी पहुंची। बचाव दलों ने कटर, क्रैन व जेसीबी की मदद से बस की लोहे की बॉडी को काटकर यात्रियों को बाहर निकाला एवं स्थानीय चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती कराया। हादसे के बाद हालोल वडोदरा हाइवे पर करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

सिलाई का मैटेरियल लाने चार सहेलियों संग निकली थी पिंकी

हादसे में सागवाड़ा पंचायत समिति के पाडवा गांव पिंकी नाई (30) की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरा अंचल सन्नाटे में डूब गया। पिंकी के जेठ अशोक नाई ने रुंधे गले से बताया कि पिंकी को हमेशा कुछ नया सीखने और आत्मनिर्भर बनने का शौक था। वह गांव में ही सिलाई का काम करती थी। सिलाई के लिए नया मैटेरियल और कपड़े खरीदने के लिए वह मोहल्ले की चार सहेलियों के साथ मंगलवार को सूरत के लिए रवाना हुई थी।

पिंकी के पति प्रकाश नाई करीब छह महीने पहले ही कुवैत कमाने गए हैं। घर में उसके तीन मासूम बच्चे (एक 7 साल का बेटा और दो छोटी बेटियां) हैं, जिन्हें वह अपनी जेठानी और दादी के भरोसे छोड़कर गई थी। बच्चों को क्या पता था कि मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। इस परिवार में ठीक एक साल पहले, 17 जून को पिंकी के ससुर की खेत में काम करते समय अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी।

परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुवैत में रह रहे भतीजे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। अब पुत्रवधु पिंकी की इस हादसे में असमय मौत ने पूरे परिवार का मनोबल तोड़ दिया है। घर में अब बूढ़ी दादी, जेठ-जेठानी और तीन बच्चों के अलावा कोई नहीं बचा। इधर, खाड़ी संकट के बीच कुवैत में रह रहे पति प्रकाश को सूचना भेजकर वापस भारत लाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

ननिहाल में आया था प्रीत

सागवाड़ा: टामटिया के प्रीत पुत्र हितेश भाटिया उम्र 9 साल अपनी मां पायल के साथ सूरत में रहता था। हितेश भाटिया दो साल से कुवैत में रोजगार के लिए गए थे। वहीं, पायल भी सूरत में निजी कार्य करती थी। प्रीत सूरत में पढ़ाई करता था। छुट्टी होने के कारण वो टामटिया और ननिहाल डैयाणा गांव में आया था।

वो अपनी मां के साथ कुछ दिनों से डैयाणा गांव में ठहरा हुआ था। मंगलवार शाम को अपनी मां पायल के साथ सूरत के लिए रवाना हुआ था। जहां पर एक्सीडेंट में प्रीत को गंभीर चोट लगने के कारण मौत हो गई। वहीं पायल घायल हो गई।

बच्चों को अच्छी पढ़ाई करने का दिया था संदेश

ओबरी तहसील के फावटा निवासी प्रकाश पुत्र रुपलाल डामोर सूरत में चाय की दुकान पर कार्य करता था। उसके घर पर दो लड़के और एक लड़की हैं। वो रिश्तेदार के यहां सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए घर आया था। सूरत वापस जाते समय बच्चों को अच्छी पढ़ाई करने की सीख दी थी। वहीं, पत्नी को इस बार वापस जल्द आने का वादा किया था। बुधवार को बस एक्सीडेंट में प्रकाश की मृत्यु के बाद परिजन वडोदरा पहुंचे।

तीन दिन पहले ही वाराणसी से लौटे थे महेंद्र

हादसे का शिकार हुए धम्बोला के महेंद्र पंड्या (68) पुत्र भोगीलाल पंड्या बेहद शांत और सरल स्वभाव के थे। वे अभी महज तीन दिन पहले ही वाराणसी (काशी) की धार्मिक यात्रा करके सकुशल लौटे थे। महेंद्र मंगलवार देर शाम कस्बे से इस बस में सवार होकर कार्य के सिलसिले में जा रहे थे।

उनका एक मकान उदयपुर में भी है, जहां उनकी पत्नी दो दिन पहले ही अपनी बेटी से मिलने गई हुई थी, जबकि उनका बेटा जर्मनी में कार्यरत है। बुधवार दोपहर जब परिवार को इस अनहोनी की सूचना मिली, तो पैतृक गांव धम्बोला में शोक की लहर छा गई। इसके बाद उदयपुर और धम्बोला से तमाम रिश्तेदार तुरंत वडोदरा के लिए रवाना हुए।

पूरे परिवार का पालनहार था मुकेश

हादसे में राजवेडा (बड़गी) गांव का बस चालक मुकेश (34) पुत्र जीवाजी डेंडोर पिछले छह वर्षों से इसी रूट पर प्रतिदिन बस चला रहा था। वह अनुभवी चालक था, लेकिन बुधवार उसके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ। मुकेश अपने परिवार का इकलौता पालनहार था। उसके बूढ़े पिता जीवाजी खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि दो छोटे भाई अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।

मुकेश के पीछे उसकी पत्नी माया देवी और तीन छोटी बेटियां रह गई हैं। सबसे बड़ी बेटी 5 साल की और दूसरी 3 साल की है, जबकि सबसे छोटी बेटी तो अभी ठीक से चलना भी नहीं सीखी है। जैसे ही मुकेश की मौत की खबर घर पहुंची, पत्नी माया देवी बेहोश हो गई। हर ग्रामीण की आंखें नम हो गई थीं।

दोस्त की शादी में आने का किया था वादा

पारडा मेहता के विनोद ननोमा के पिता नरेश ननोमा ने बताया कि वो सूरत में चाय के ठेले पर काम करता था। कुछ दिन पहले सूरत से पूरे परिवार के लिए नए कपड़े लेकर आया था। यहां पर शादियों में वापस लौटने का वादा करके गया था। उसके पिता ने बताया कि वो अपने काम के प्रति समर्पित था।

एक अन्य मृतक राजेंग पुत्र वेलजी कटारा मूलतः पारडा मेहता गांव का था। वो सूरत में रोजगाररत था एवं कुछ दिन पहले शनिवार, रविवार की छुट्टी लेकर घर लौटा था। मंगलवार शाम को वो वापस सूरत के लिए लौट गए। राजेंग बच्चों, मां और पत्नी को वापस जल्द आने का वादा करके गया था, लेकिन हादसे में उसकी मौत हो गई।

सागर की शादी बनी जीवनदान, चचेरे भाई की मौत

हादसे के पीछे नियति का एक अजीब संयोग भी सामने आया है। अमूमन ड्राइवर मुकेश के साथ बस में दो परिचालक सूरज डेंडार और सागर डेंडोर ड्यूटी करते थे। दोनों आपस में रिश्तेदार भी थे और गहरे दोस्त भी।

सागर डेंडोर की 18 जून को शादी होने वाली है, जिसके कारण वह रविवार से ही छुट्टी पर चल रहा था। सागर की इसी शादी ने उसे इस काल के गाल में समाने से बचा लिया और उसे जीवनदान मिल गया। हालांकि, सागर की जगह ड्यूटी पर तैनात सूरज उर्फ सुरेश डेंडार (कांवरा डूंगरा) हादसे के वक्त चालक के बगल वाली सीट पर ही बैठा था। टक्कर इतनी भीषण थी कि सूरज के सिर और छाती में गंभीर चोटें आई हैं, जिसकी वडोदरा के अस्पताल में इलाज के दौरान शाम को मौत हो गई।

हादसे में ये हुए घायल

हादसे में कमल गटूलाल कटारा, रामचंद्र रसिया भाई डोडिया, महेंद्र रमेश कटारा, आशीष महेंद्र कटारा, जीवराज शंकर कलासुआ, पंकज दलजी बुनकर, विजय लक्ष्मण कटारा, सागरमल पूनमचंद कटारा, कल्पेश नगजी गायरी, धर्मिष्ठा, रमेश हरमोर, मनीष रमण रावल, शिल्पा पाटीदार, आशीष यादव, बंशीलाल राणे, गूंजा, पिंटू चरपोट, भैरूलाल मीणा, सीमा यादव, भगवती पटेल, पायल नाई, संतोष यादव, पंकज श्यामजी और माया पाटीदार आदि घायल हो गए।

एनडीआरएफ की छठी बटालियन के कमाडेंट सुरेंद्र सिंह ने बताया कि नियंत्रण कक्ष में सुबह 4 बजकर 40 बजे सूचना मिलने के बाद टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया एवं 24 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला।

वडोदरा के उप महापौर आदित्य पटेल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस व चिकित्सा टीमों को मौके पर भेजा गया था। मामूली रूप से घायलों का मौके पर ही प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर घायलों को अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। उधर, इस मामले में जरोद थाने में आरोपी ट्रक चालक नवनीत उर्फ नवलो वाघेला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। जूनागढ़ मूल के आरोपी को पुलिस ने पकड़ा।