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सरकारी आदेश के बाद भी 1200 कर्मचारियों की सैलरी अटकी, दुर्ग निगम में वित्तीय अधिकार बना रोड़ा

Durg Municipal Corporation: दुर्ग नगर निगम के करीब 1200 कर्मचारियों की सैलरी अटक गई है। नियमित कमिश्नर की पदस्थापना नहीं होने और प्रभारी उपायुक्त को वित्तीय अधिकार न मिलने से वेतन समेत कई जरूरी भुगतान रुके हुए हैं।
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Corporation Employees Delay

1200 कर्मियों का वेतन अटका (photo source- Patrika)

Corporation Employees Delay: नगर निगम में नियमित कमिश्नर की पदस्थापना नहीं होने का असर अब सीधे कर्मचारियों की जेब पर पडऩे लगा है। करीब 1,200 कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। पूर्व कमिश्नर सुमित अग्रवाल के तीन जुलाई को रायपुर स्थानांतरण के बाद से पद खाली है। उपायुक्त मोहेंद्र साहू प्रभार संभाल रहे हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं। इसके चलते वेतन समेत निगम के कई जरूरी भुगतान अटक गए हैं।

Municipal Employees Salary: निगम कर्मचारियों के खाते खाली

शासन के निर्देश के अनुसार निकायों और शासकीय विभागों में कर्मचारियों को हर महीने सात तारीख तक वेतन भुगतान किया जाना है। इसके बावजूद निगम कर्मचारियों के खाते खाली हैं। बताया गया है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज तैयार हैं, लेकिन वित्तीय अधिकार वाले अधिकारी के अभाव में भुगतान आदेश जारी नहीं हो पा रहा है।

डीजल से लेकर स्टेशनरी के बिल भी अटके

वित्तीय अधिकार नहीं होने का असर निगम के रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ रहा है। कचरा वाहनों, जेसीबी और जलापूर्ति के वाहनों के डीजल-पेट्रोल के भुगतान अटके हैं। स्टेशनरी और दैनिक जरूरत के सामान की आपूर्ति करने वाले वेंडरों के बिल भी लंबित हैं। इससे निगम का मैदानी और कार्यालयीन कामकाज प्रभावित होने लगा है।

हर महीने 3.5 करोड़ का वेतन भुगतान

निगम में नियमित, प्लेसमेंट और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या करीब 1,200 है। इनके वेतन पर हर महीने लगभग 3.5 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। वेतन में देरी से कर्मचारियों के सामने घर का खर्च, बच्चों की फीस, राशन और बैंक की ईएमआई चुकाने का संकट खड़ा हो गया है।

Salary of corporation employees: स्थायी व्यवस्था की मांग

वेतन भुगतान में देरी से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से तत्काल नियमित कमिश्नर की पदस्थापना की मांग की है। साथ ही उनका कहना है कि नियुक्ति में यदि और समय लगता है तो कम से कम वेतन जैसे अनिवार्य भुगतान के लिए प्रभारी उपायुक्त को तत्काल वित्तीय अधिकार दिए जाएं।

निगम में वेतन के अलावा अन्य आवश्यक भुगतानों को लेकर भी स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसे में नियमित कमिश्नर की नियुक्ति और प्रभारी अधिकारी को वित्तीय अधिकार मिलने का इंतजार बना हुआ है। अधिकारियों के वित्तीय अधिकार स्पष्ट होने के बाद ही अटके भुगतान और वेतन प्रक्रिया के सामान्य होने की उम्मीद है।