
दुर्ग. लॉकडाउन ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिले में करीब 30 हजार हेक्टर में सब्जियों और करीब 10 हजार हेक्टर में टमाटर की फसल लगी है। लॉकडाउन लगने के बाद तैयार फसल खेतों में पड़े रहे। लॉकडाउन लगे 21 दिन हो गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर नुकसान का आंकलन करें तो कम से कम 10 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है। नुकसान इससे अधिक होगा पर कम नहीं। पहले गर्मियों में जिले के खेतों में आकर यूपी, नोएडा, दिल्ली, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के व्यापारी स्थानीय बाजार से दोगुने दाम पर सब्जियां खरीदकर ले जाते थे, इस बार नोएडा और दिल्ली तो दूर लोकल बाजार भी बंद है।तैयार फसल बाडिय़ों में ही खराब हो रही है। जो बचे भी है, उनका भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।
कोरोना के कारण नहीं हो पा रही है बिक्री
दुर्ग जिले में करीब 35 हजार किसान साग-सब्जियों की खेती करते हैं। पूरे प्रदेश में सर्वाधिक 1 लाख 90 हजार मीट्रिक टन टमाटर की पैदावार यहीं होता है। करीब इतना पैदावार दूसरे साग-सब्जियों की भी होती है। सब्जियों की खेती करने वालों में 80 फीसदी छोटे व मंझोले किसान हंै। इनके उत्पादन की अधिकतर खपत लोकल बाजार में होती है। कोरोना के कारण लोकल बाजार बंद है। बिक्री नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि मूल लागत की वसूली भी मुश्किल है।
सूखने के लिए छोड़ दिया टमाटर
धमधा के सिलीडीह, कन्हारपुरी, पथरिया, डोमा, जाताघर्रा, गाड़ाघाट, दानी कोकड़ी, घसरा, खिलोरा, सुखरीकला के 60 फीसदी से ज्यादा किसान टमाटर और सब्जी की खेती करते हैं। इनमें से अधिकतर किसानों ने फसल को खेतों में छोड़ दिया है। खरीदार नहीं होने के कारण इन किसानों को तोड़ाई की मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।
कद्दू-लौकी को खरीदार का इंतजार
पिछली बार लॉकडाउन में नुकसान के बाद अधिकतर किसानों ने जल्द खराब होने वाली सब्जियों की मात्रा घटाकर लौकी और कद्दू पर फोकस किया। यह फसल भी तैयार हो गई है। बाजार खुलने की उम्मीद में किसानों ने तैयार कद्दू और लौकी तोड़कर घरों में रख लिया गया, लेकिन इनके भी खरीदार नहीं मिल रहे।
पिछले साल भी झेल चुके हैं घाटा
पिछले साल भी इसी तरह मार्च में कोरोना के संक्रमण के कारण प्रदेश के साथ जिले में लॉकडाउन लगाया गया था। तब लॉकडाउन मई के अंत तक चला था। इस दौरान अधिकतर समय जिले की सीमाएं सील रही व लोकल बाजार भी बंद रखा गया। तब भी किसानों को इसी तरह भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
चौथी लॉकडाउन से बढ़ी चिंता जिले में चौथी बार लगा लॉकडाउन
पहेल 6 अप्रैल से 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन लगाया गया। इसके साथ ही जिले की सीमाओं के साथ सब्जी बाजारों को भी बंद कर दिया गया। इसके बाद 15 से 19 और तीसरी बार 26 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाया गया।अब 6 मई तक बढ़ाया गया है।
फेरी से राहत,लेकिन कीमत नहीं
तीसरे लॉकडाउन में सब्जी वालों को फेरी लगाकर बेचने की छूट दी गई है। इससे लोगों के साथ किसानों को भी आंशिक राहत मिली है, लेकिन खेतों में आकर खरीदी की परेशानी के कारण फेरी वालों से पर्याप्त कीमत नहीं मिल रही है। दूसरी ओर अन्य प्रदेशों में कोरोना के बढऩे के कारण फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। कृष्णा देवांगन अध्यक्ष, किसान कांग्रेस दुर्ग ने बताया कि लॉकडाउन से सर्वाधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। कई महीनें की मेहनत और हजारों रुपए खर्च कर तैयार फसल खरीदी-बिक्री नहीं होने के कारण खेतों में ही सड़ रहे हैं।
पिछली बार भी इसी तरह नुकसान उठाना पड़ा था। सरकार से किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग की जाएगी। रविप्रकाश ताम्रकार, सब्जी उत्पादक किसान बोड़ेगांव ने बताया कि सब्जी की फसल को तोड़कर रख नहीं सकते। छोटे-छोटे किसान किसी तरह थोड़ा बहुत सब्जी घूमकर बेच ले रहे हैं। बाहर भेजने वाले कुछ नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए सब्जी बाडियों में छोडऩा पड़ा। बीस दिन में कम से कम 10 करोड़ का नुकसान जिले के सब्जी उत्पादक किसानों को हुआ है।
Updated on:
27 Apr 2021 05:45 pm
Published on:
27 Apr 2021 05:45 pm
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