24 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कर्जमाफी की मांग पर किसानों का प्रदर्शन, धमधा से रायपुर निकले तो मुरमुंदा में पुलिस ने रोका रास्ता

Dhamdha Farmers Protest: धमधा के किसान 17 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल के बाद कर्जमाफी समेत अन्य मांगों को लेकर रायपुर मार्च पर निकले।
3 min read
Google source verification
Chhattisgarh Farmers Protest

धमधा में किसानों का आंदोलन तेज (Photo Source- Patrika Create)

Chhattisgarh Farmers Protest: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। कृषि ऋण माफी समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किसान बंधु संगठन के बैनर तले किसान पिछले 17 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं। आंदोलन के बावजूद मांगों पर ठोस समाधान नहीं मिलने से नाराज किसानों ने गुरुवार को धमधा से राजधानी रायपुर की ओर मार्च शुरू कर दिया।

रायपुर की ओर बढ़ रहे किसानों को कुम्हारी पहुंचने से पहले ही मुरमुंदा में पुलिस और प्रशासन की टीम ने रोक लिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों को आगे जाने से रोकने का प्रयास किया गया। इसके बाद किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत का रास्ता निकालने के लिए 10 किसानों के प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों से चर्चा के लिए रायपुर भेजा गया। वहीं, बाकी किसान मुरमुंदा में ही रुके रहे और अपनी मांगों पर कायम रहे।

Raipur farmers march: 17 दिन से चल रही क्रमिक भूख हड़ताल

किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से कृषि ऋण से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार आवेदन और बातचीत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। इसी के चलते किसान बंधु संगठन के नेतृत्व में पिछले 17 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल की जा रही है। किसानों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना और पात्र किसानों को राहत दिलाना है।

प्रशासन ने बातचीत का दिया था प्रस्ताव

रायपुर मार्च से एक दिन पहले बुधवार को एसडीएम और तहसीलदार आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और कुछ किसानों को बैंक भेजकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करने की सलाह दी थी। प्रशासन की ओर से यह रास्ता समाधान की दिशा में बातचीत के तौर पर रखा गया था। हालांकि किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई। किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल ने कहा कि किसान पहले ही बैंक और प्रशासनिक कार्यालयों के कई चक्कर लगा चुके हैं। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। किसान नेताओं का कहना है कि अब केवल आश्वासन के बजाय उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।

मुरमुंदा में पुलिस ने रोका किसानों का मार्च

गुरुवार को जब किसान धमधा से रायपुर की ओर बढ़े तो प्रशासन ने उन्हें कुम्हारी से पहले मुरमुंदा में रोक दिया। मौके पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल के जरिए बातचीत का रास्ता निकाला। 10 किसानों को रायपुर भेजा गया, जहां वे अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखेंगे। दूसरी ओर, बाकी किसान मुरमुंदा में ही डटे रहे। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

क्या है किसानों की कर्जमाफी से जुड़ी मांग?

धमधा ब्लॉक के खपरी, परसबोड़, कुटहा, पेंड्री और खैरझीटी गांवों के किसान इस आंदोलन में शामिल हैं। किसानों के अनुसार, उन्होंने कोरोना काल से पहले निजी बैंक आईडीबीआई की अलग-अलग शाखाओं से कृषि ऋण लिया था। किसानों की प्रमुख मांग वर्ष 2018 के NPA खातों की जांच से जुड़ी है। उनका कहना है कि इन खातों की विस्तृत जांच की जाए और जांच के बाद पात्र किसानों को संबंधित योजना का लाभ दिया जाए।इसके अलावा किसान जांच पूरी होने तक ऋण वसूली पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। वे कुर्की और जमीन की नीलामी जैसी कार्रवाई को भी रोकने की मांग उठा रहे हैं।

NPA खातों की जांच और वसूली रोकने की मांग

किसानों का कहना है कि उनके खातों की स्थिति और पात्रता की जांच स्पष्ट तरीके से होनी चाहिए। उनका दावा है कि यदि जांच के बाद किसान पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें संबंधित राहत योजना का लाभ मिलना चाहिए। इसी के साथ वे मांग कर रहे हैं कि जांच पूरी होने तक बैंक या संबंधित संस्थाओं की ओर से ऋण वसूली, कुर्की और भूमि नीलामी की कार्रवाई नहीं की जाए। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि मामले में संबंधित विभाग और बैंक स्तर पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

Chhattisgarh agriculture news: अब प्रतिनिधिमंडल की बातचीत पर नजर

मुरमुंदा में किसानों को रोके जाने के बाद अब 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत अहम मानी जा रही है। किसानों की ओर से कर्जमाफी, NPA खातों की जांच और जांच पूरी होने तक वसूली संबंधी कार्रवाई रोकने की मांग रखी जाएगी। फिलहाल बाकी किसान मुरमुंदा में ही मौजूद हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत से क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर है।